आपने वो मिसाल तो कभी न कभी सुनी ही होगी कि ‘जोरू का भाई एक तरफ, सारी खुदाई एक तरफ’। जाने भारत में मीडिया का यही हाल हो, लेकिन अपने पाकिस्तान में तो ऐसा है कि जब मीडिया आजाद और निजी नहीं था तो अखबार पढ़ने और टीवी देखने वालों को पाकिस्तान के बारे में हो न हो, विश्व के बारे मे अच्छी-ख़ासी जानकारी रहती थी।
सरकारी मीडिया पाकिस्तानियों का ध्यान देश में चल रहे घोटालों से हटाने के लिए अपने न्यूज़ बुलेटिन को विदेशी घटनाओं से भर देता था।
दुनिया पेरिस दिखा रही थी और पाक..
फिर करना ख़ुदा का ये हुआ कि अब से कोई 15 बरस पहले मीडिया सरकारी से निजी हो गया और आज तरक्की करता-करता कुएं का वो मेंढ़क बन गया है, जिसे देश से बाहर क्या हो रहा है क्या नहीं, इसकी न कोई परवाह है, न चिंता और न ही दिलचस्पी। मसलन रात को जब मैं अनेक अंतरराष्ट्रीय टीवी
चैनलों की सर्फिंग कर रहा था तो हर तरफ पेरिस के नरसंहार को लेकर भांति-भांति की हाहाकार मची हुई थी। लेकिन जैसे ही मैंने पाकिस्तान के देसी चैनलों पर रिमोट को रोका तो खबरें देखकर तबीयत झक हो गई।
जरा एक देसी चैनल के मुख्य आकर्षण सुनिए और हर सुर्खी के साथ ढें-ढें-ढें-ढें खुद लगा लीजिए। ‘कराची के इलाके नाजिमाबाद में एक पुलिसवाला घायल’‘इमरान खान ने पंचायती चुनाव अभियान शुरू किया’ ‘लाहौर में डेंगी बुखार के 12 नए रोगी अस्पतालों में दाखिल’ ‘लंदन में मोदी आगे-आगे, ब्रिटिश मीडिया पीछे-पीछे’ और पेरिस में धमाकों और फायरिंग से मरने वालों की संख्या 128 तक जा पहुंची।
पाक मीडिया में पेरिस घटना की औकात
यानी पेरिस में घटी घटना की औकात हमारी मीडिया की नजरों में ये है कि उसे सबसे आख़िरी समाचार वाले पायदान पर जगह मिली। कुएं में बंद इस मीडिया कल्चर ने बस इतना किया है कि सोच की खिड़कियां और रोशनदान बंद कर दिए हैं।
जब दूसरे के बारे में पता ही नहीं चलेगा तो खुशी और तकलीफ बांटने की आदत ही कहां से पड़ेगी। चुनांचे क्या अनपढ़, क्या पढ़ा लिखा, सभी कुछ ऐसी बातें करते हैं। वो जी पेरिस को छोड़ें, इतने तो हमारे यहां रोज मर जाते हैं
मीडिया लोगों को अपने खोल से बाहर निकालता है
किसने कहा था पश्चिमी देशों को कि सीरिया और इराक में जाकर पंगा लें, जब आप दाइस को मारेंगे तो वो भी तो मारेंगे। अरे साहब ये सब हिंदू और यहूदी मिलकर करवा रहे हैं। मुसलमान तो बेचारा हर जगह पिट ही रहा है। उसने न मारा तो किसी और ने मार दिया। अच्छा...पेरिस में 130 लोग मर गए।
वेरी सॉरी यार...अच्छा ये बता तेरे प्रमोशन का क्या हुआ...मिठाई नहीं खिलाएगा।इन हालात में जो भी ये कहे कि मीडिया लोगों को अपने खोल से बाहर निकालता है और बाकी दुनिया से जोड़ता तो ऐसे आदमी को कम से कम एक बार घूरकर देखना तो बनता ही है। गालियां भले दिल ही दिल में दे लीजिए।