पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लगातार बढ़ रही मानवाधिकार हनन की घटनाओं के मद्देनजर यहां के एक समूह ने अमेरिका से दखल देने और मदद की गुहार लगाई है। इस समूह ने अमेरिकी सांसदों से अपील करते हुए कहा है कि पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में जबरन कब्जा कर रखा है, अब यहां पाक का राज खत्म किया जाना चाहिए।
वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ गिलगित-बाल्टिस्तान के सेंगे सेरिंग ने कैपिटल हिल में हाल में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी सांसदों से मुलाकात की। उन्होंने सांसदों से कहा कि गिलगित बाल्टिस्तान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद के बिना मानवाधिकार हनन की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। इस क्षेत्र में पाकिस्तान का राज खत्म करने और उसके खिलाफ संघर्ष में गिलगित-बाल्टिस्तान का साथ देने के लिए अमेरिका को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। सेरिंग ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रिजोल्यूशन 47 में भी पाकिस्तान को गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओके) में कब्जा जमाने वाला करार दिया है साथ ही यहां से उसकी पूरी तरह से वापसी की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि पीओके के लोग अपने इलाके से पाकिस्तान और चीनियों को पूरी तरह से हटाने की मांग करते हैं जिन्होंने उनके इलाके पर जबरदस्ती कब्जा जमा रखा है और यहां के खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। सेरिंग ने कहा कि पाकिस्तान यहां का विकास नहीं चाहता है। पिछले हफ्ते यह कार्यक्रम सीनेटर टिम काएने ने आयोजित किया था। इसमें अमेरिकी सीनेटर जॉन कार्निन, जॉन मैक्केन, काएने, मार्क वार्नर के अलावा प्रतिनिधि सभा से बारबरा कॉमस्टॉक, गेरी कोनॉली, शीला जैक्सन ली, जो लोफग्रेन, क्रिस स्मिथ समेत कई शीर्ष सांसद मौजूद थे।
सेरिंग ने पीओके में चीनी कंपनियों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चीन वहां पर बिना किसी संवैधानिक ढांचे या जवाबदेह सरकार के अरबों डॉलर का आर्थिक गलियारा बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चीन से सवाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाक सेना और खुफिया एजेंसियों ने गिलगित बाल्टिस्तान में हजारों एकड़ निजी जमीन पर कब्जा कर रखा है। वे सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन कर रहे हैं।