पाकिस्तान में खौफ के साए में जी रहे हिंदुओं को तीर्थयात्रा के लिए भारत आने में भी बड़े कष्ट झेलने पड़े। पाकिस्तानी अफसरों ने करीब 250 हिंदुओं को वाघा बॉर्डर पर सात घंटे तक रोके रखा। लंबी उहापोह के बाद उन्हें भारत जाने की इजाजत तो दी गई, लेकिन इससे पहले उनसे लिखित वादा भी लिया गया कि वे भारत में राजनीतिक शरण नहीं मांगेंगे और वहां पाकिस्तान को बदनाम नहीं करेंगे।
पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान से हिंदुओं के पलायन कर भारत जाने की खबरें मीडिया में आने के बाद इन लोगों को वाघा पर रोका गया। पाक टीवी चैनलों ने सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि भारत जा रहे इन हिंदुओं के वापस लौटने की संभावना कम ही है। लेकिन इन हिंदुओं ने मीडिया के दावों को खारिज करते हुए पाकिस्तानी आव्रजन अधिकारियों को यकीन दिलाया कि वे हरिद्वार और वैष्णो देवी दर्शन के लिए निकाले हैं।
उन्हें अफसरों को लिखित में यह भी भरोसा दिलाना पड़ा कि वे भारत जाकर पाकिस्तान के बारे में कुछ गलत नहीं बोलेंगे। इसके बाद ही दोपहर करीब ढाई बजे इन हिंदुओं को सीमा पार करने की इजाजत दी गई, जबकि ये लोग सुबह 8 बजे ही वाघा बॉर्डर पर पहुंच गए थे। अमृतसर पहुंचने के बाद हिंदुओं के इस जत्थे में शामिल लोगों ने बताया कि जो हिंदू पाकिस्तान लौटने का शपथपत्र नहीं देते हैं, उन्हें पाक से भारत आने की इजाजत नहीं दी जा रही है। उन्होंने पाकिस्तान हिंदुओं की दयनीय हालत के बारे में भी बताया।
वहीं, पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्री के निर्देश मिलने के बाद इन हिंदुओं को भारत जाने की इजाजत दे दी गई। इन सभी के पास वैध वीजा है। हमने उन्हें अस्थायी तौर पर रोका था क्योंकि मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि वे पाकिस्तान में मुश्किल हालातों के चलते मुल्क छोड़कर भारत जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने हिंदुओं से शपथ पत्र लिए जाने की बात से इनकार किया।
क्या था मामला
सिंध प्रांत के जैकबाबाद से 7 अगस्त को हिंदू किशोरी मनीषा कुमारी के अपहरण की खबर आने के बाद करीब 250 हिंदुओं के भारत पलायन करने की योजना की खबरें आईं थीं। इस पर गृह मंत्री रहमान मलिक ने एफआईए की जांच के बाद ही हिंदुओं को भारत जाने की इजाजत देने की बात कही थी।
क्या हैं दिक्कतें
-पाक मीडिया के मुताबिक हिंदुओं को जबरन धर्म परिवर्तन, वसूली, उत्पीड़न और लड़कियों के अपहरण जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
-52 हिंदू परिवारों के करीब छह माह पहले भी जैकबाबाद से पलायन कर भारत आने की चर्चाएं हैं।