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न इस्तीफा दूंगा, न छुट्टी लूंगा: नवाज शरीफ

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पाकिस्तान में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस में रेड जोन में दोबारा झड़पें शुरू हो गई हैं।
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उधर बीबीसी उर्दू के पत्रकार ताहिर इमरान ने बताया है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 12 पार्टियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा है कि वे न तो इस्तीफा देंगे और न ही छुट्टी पर जाएंगे।

इससे पहले इमरान खान और ताहिरूल कादरी समेत कई नेताओं के खिलाफ बगावत का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

सोमवार को प्रदर्शनकारी पहले सचिवालय में और उसके बाद पीटीवी चैनल के दफ्तर में भी घुस गए थे और उसका प्रसारण बंद करवा दिया था।

पाकिस्तान में पिछले पखवाडे से अधिक समय से इन दोनों पार्टियों के नेता और इनके समर्थक इस्लामाबाद में प्रदर्शन कर रहे हैं।

वे डेढ साल पहले हुए चुनावों में धांधली का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

'इस्तीफे की सलाह का खंडन'

सेना और सरकार ने इस बात का खंडन किया है कि सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अपने पद से इस्तीफा देने या तीन महीने के लिए छुट्टी पर चले जाने की सलाह दी है।

जनरल राहील शरीफ और नवाज शरीफ की मुलाकात के बाद पाकिस्तान के कई निजी टीवी चैनल इस तरह की खबरें चला रहे हैं कि सेना ने उन्हें अपना पद छोडने के लिए कहा है।

सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि इस तरह की खबरें बिल्कुल बेबुनियाद हैं। सेना के जनसंपर्क अधिकारी मेजर जनरल आसिफ बाजवा ने भी ट्वीट करके कहा कि इस तरह की खबरें गलत हैं।

नवाज शरीफ सरकार के प्रवक्ता ने भी इस तरह की खबरों का खंडन किया है।

रविवार देर रात सेना के  कोर कमांडरों की बैठक और सोमवार को पाकिस्तान के सरकारी टीवी चैनल पीटीवी के दफ्तर में प्रदर्शनकारियों के घुस जाने के बाद पैदा हुए हालात के बीच इन दोंनों की बैठक हुई थी।

एक दूसरे घटनाक्रम में पाकिस्तान में  सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस नासिरुल मुल्क ने सभी जजों को फौरन इस्लामाबाद पहुंचने के लिए कहा है।
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सुप्रीम कोर्ट की पेशकश

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पाकिस्तान में जारी राजनीतिक संकट को दूर करने के लिए वो कोई भी रोल अदा करने के लिए तैयार है।

इस संबंध में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ(पीटीआई) और मौलाना ताहिरुल कादरी की पार्टी पाकिस्तान अवामी तहरीक (पीएटी) के वकीलों से उनके प्रस्तावों को भी मांगा है।

इससे पहले सोमवार को प्रदर्शनकारी पहले सचिवालय में और उसके बाद  पीटीवी चैनल के दफ्तर में भी घुस गए थे और उसका प्रसारण बंद करवा दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की इस पहल पर कई जजों की राय अलग है।

सुप्रीम कोर्ट की इस पेशकश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस तारिक महमूद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का ये काम नहीं है कि वो बीच-बचाव करे।

वहीं पूर्व न्यायाधीश जस्टिस नासिर इकबाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को ये अधिकार है कि वो प्रदर्शनकारियों और उनके नेताओं से कहें कि वो जो कुछ कर रहे हैं वो असंवैधानिक है।

जस्टिस इकबाल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के पास पहले से एक मुकदमा दर्ज है और अदालत जब चाहे अपना फैसला सुना सकती है।
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