8 नवंबर, 2010
आसिया बीबी को शेखपुरा की अदालत में पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने का दोषी पाया गया और मौत की सजा सुना दी गई।
17 नवंबर, 2010
पोप बेनेडिक्ट XVI ने आसिया की रिहाई की मांग की और कहा कि पाकिस्तान में ईसाई भेदभाव का शिकार होते हैं।
4 जनवरी, 2011
पंजाब के राज्यपाल सलमान ताहीर की पुलिस बॉडीगार्ड ने हत्या कर दी क्योंकि वह जेल में आसिया से मिलने गए थे। बॉडीगार्ड ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से कहा कि आसिया मौत की हकदार है। आसिया की रिहाई के लिए ताहीर द्वारा दायर याचिका के बाद जरदारी ने केस की समीक्षा करने को कहा।
2 मार्च, 2011
पाकिस्तान के अकेले अल्पसंख्यक मंत्री शाहबाज की हत्या कर दी गई। उनकी हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने निंदा के कानूनों में बदलाव के लिए अभियान चलाया था।
16 अक्तूबर, 2014
लाहौर हाई कोर्ट ने आसिया बीबी की दोषसिद्धि को सही ठहराया और मृत्यु दंड को मंजूरी दे दी।
22 जुलाई, 2015
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मृत्यु दंड की सजा को तब तक के लिए निलंबित कर दिया जब तक अपील की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। मामले में आसिया के खिलाफ कुल 7 गवाह थे।
31 अक्तूबर, 2018
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए आसिया के खिलाफ सुनाए गए फैसले को खारिज किया और रिहाई का फैसला सुनाया।