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जाधव मामला: क्या पाकिस्तान अपनी हार स्वीकार करेगा, जानिए ICJ की शक्तियां?

Thu, 18 May 2017 03:36 PM IST
amarujala.com, Presented By: मोहित
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कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)
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क्या है वियना समझौता
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यह एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसके तहत एक देश का नागरिक यदि दूसरे देश में बंदी होता है तो उसे अपने देश के उच्चायोग या दूतावास के अधिकारियों से मिलने का अधिकार होगा। इस समझौते का पूरा नाम ‘ऑप्शनल प्रोटोकॉल टू द् वियना कंवेंशन ऑन कॉन्स्यूलर रिलेशन्स कंसर्निंग द् कंपलसरी सेटलमेंट ऑफ डिस्प्यूट्स, 1963’ है।

- भारत ने समझौते पर नवंबर 1977 में हस्ताक्षर किए और पाकिस्तान ने मार्च 1976 में 

बिना सुनवाई फांसी पर रोक संभव?
समझौते के तहत, आईसीजे के नियमों के आर्टिकल 74, पैरा 4 के तहत आईसीजे के चीफ किसी भी सदस्य देश से बिना सुनवाई हुए फांसी पर रोक लगाने का अनुरोध कर सकते हैं।
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भारतीय सेना के अधिकारी सौरभ कालिया की यातना और हत्या मामले में भारत आईसीजे क्यों नहीं गया? यह मामला आईसीजे के दायरे में नहीं आता, क्योंकि भारत के 18 सितंबर, 1974 के डिक्लेरेशन के मुताबिक
- दुश्मनी, लड़ाई, आत्मरक्षा से जुड़े विवाद इसके दायरे में नहीं आते।
- उन सभी समझौतों से उपजे विवाद जिसमें सभी पक्ष समझौते का हिस्सा नहीं हैं या इस पर सरकार की सहमति न हो भी इसके दायरे में नहीं आते।

पाक के पक्ष में भी गया था फैसला
भारत ने 46 साल बाद आईसीजे में मामला दायर किया है। इससे पहले 1971 में भारत इंडियन एयरलाइंस के विमान के अपहरण के बाद अपने हवाई क्षेत्र में पाकिस्तानी विमानों के उडऩे संबंधी अधिकार के लिए आईसीजे पहुंचा था। हालांकि अदालत का फैसला पाकिस्तान के पक्ष में आया था।
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पाकिस्तान आईसीजे के निर्देश को मानेगा?

- फोटो : self
पाकिस्तान आईसीजे के निर्देश को मानेगा?
आईसीजे ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि उसके आदेश पूरी तरह बाध्यकारी हैं और चूंकि संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय अदालत के आदेश को मानने की शपथ लिए होते हैं, इसलिए उसके फैसले को लागू ना करना संभव नहीं होता। 

हालांकि इसमें कुछ अपवाद भी शामिल हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अदालत के पास अपने आदेश को लागू करवाने के लिए कोई प्रत्यक्ष शक्ति नहीं होती है। ऐसे में किसी देश को अगर लगता है कि दूसरे देश ने आईसीजे के आदेश की 

तामीली नहीं की, तो वह इस पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गुहार लगा सकता है। ऐसे में जहां पाकिस्तान में वहां की सेना का फैसला आखिरी होता है। ऐसे में शरीफ सरकार अगर आईसीजे का फैसला मानना भी चाहे तो क्या सेना उसे मानने देगी? यह एक बड़ा सवाल है।

क्या है आईसीजे
आईसीजे संयुक्त राष्ट्र का महत्वपूर्ण न्यायिक अंग है। इसकी स्थापना 1945 में हॉलैंड के शहर हेग में हुई थी और 1946 से इसने काम करना शुरू कर दिया।
- आईसीजे में 15 न्यायाधीश हैं, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा नौ साल के लिए चुने जाते हैं।
- इसकी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच हैं।

क्या है अधिकार क्षेत्र?
आईसीजे की वेबसाइट के अनुसार इसका काम दो देशों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करना है और अधिकृत संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशेष एजेंसियों द्वारा उठाए कानूनी प्रश्नों पर राय देना है। यानी इसके तीन ख़ास कर्तव्य हैं -

1. अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार यह कानूनी विवादों पर निर्णय लेता है।
2. दो पक्षों के बीच विवाद पर फैसले सुनाता है।
3. संयुक्त राष्ट्र की इकाइयों के अनुरोध पर राय देता है।
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