आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा का सरगना और दुनिया के सबसे वांछित आतंकियों में शुमार हाफिज सईद के संगठनों पर पाकिस्तान की सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने जमात-उद-दावा और उसकी सहयोगी संस्था फलाही इंसानियत फाउंडेशन को देश में राहत व दान कार्य जारी रखने की अनुमति दे दी है।
सर्वोच्च न्यायालय की दो सदस्यीय बेंच जिसमें न्यायाधीश मंजूर अहमद मुल्क और न्यायाधीश सरदार तारिक मसूद थे, ने बुधवार को संघीय सरकार की लाहौर हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया।
दो आतंक विरोधी अधिकारियों के मुताबिक जमात-उद-दावा तीन सौ मदरसों व स्कूलों के साथ एक प्रकाशन संस्था और एक एंबुलेंस सर्विस का संचालन करता है। जमात-उद-दावा और फलाही इंसानियत फाउंडेशन के संयुक्त रूप से करीब 50 हजार स्वयंसेवक हैं और सैकड़ों की संख्या में लोग यहां नौकरी कर रहे हैं।
इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने कंपनियों और व्यक्तियों पर जमात-उद-दावा, फलाही इंसानियत फाउंडेशन के साथ यूएनएससी (यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल) की प्रतिबंध सूची में शामिल संस्थाओं को दान देने पर रोक लगा दी थी।
पाकिस्तान के सिक्योरिटी एवं एक्सचेंज कमीशन की ओर से जारी एक सूचना में कहा गया है कि सभी कंपनियों को मना किया गया है कि वह किसी भी ऐसी संस्था या व्यक्ति को दान न दें जो यूएनएससी की सूची में शामिल हैं।
सईद के आतंकी नेटवर्क के खिलाफ पाकिस्तान सरकार ने बैन लगाकर बड़ा कदम उठाया था। इस नेटवर्क में 300 मदरसे और स्कूल, अस्पताल और एक प्रकाशन संस्था शामिल है। इसके अलावा जेयूडी और एफआईएफ के पास 50 हजार वालंटियर हैं। सैकड़ों लोग उसके लिए काम करते हैं।
बता दें कि यूएनएससी ने अल-कायदा, तहरीक-ए-तालीबान पाकिस्तान, लश्कर-ए-जांघवी, जमात-उद-दावा, एफआईएफ, लश्कर-ए-तैयबा समेत कई संगठनों पर पाबंदी लगा दी थी।