मुंबई पर हुए 26/11 आतंकी हमले में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ था। 2008 में हुए इस आतंकी हमले के बाद एजेंसी के तत्कालीन प्रमुख ने खुद यह बात स्वीकार की थी।
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी सीआईए के पूर्व प्रमुख की मानें, तो आईएसआई के तत्कालीन प्रमुख ने यह जानते हुए भी इस मामले में कार्रवाई करने मना कर दिया था।
सीआईए के निदेशक रह चुके माइकल हेडन ने अपनी किताब ‘प्लेइंग टू दि एड्ज’ में इन बातों का खुलासा किया है। उन्होंने अपनी किताब में पाकिस्तान के दोहरे आचरण की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने किताब में लिखा है कि पाकिस्तानी सेना आतंकियों से लड़ने के लिए नहीं, बल्कि भारत से लड़ने के लिए तैयार की गई है। हेडन ने लिखा है कि पिछले दशक में जिन दिग्गजों ने पाकिस्तानी सेना की नींव रखी थीं, वे हमेशा आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने से बचते रहे हैं।
2009 तक सीआईए निदेशक रहे हेडन ने मुंबई हमले को लेकर कहा कि यह बहुत साफ था कि हमले में पाकिस्तान का हाथ है।
हेडन ने बताया कि हमले के बाद मैंने तत्कालीन आईएसआई चीफ और सैन्य ऑपरेशन के निदेशक रह चुके शुजा पाशा से फोन पर बात की और उन्हें हमले की तह में जाने की बात कही। तब पाशा ने स्वीकार किया था कि आईएसआई के कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी मुंबई पर हमला करने वाले आतंकियों को प्रशिक्षण देने के काम में शामिल थे।
हेडन ने लिखा है, ‘हमें (अमेरिका) इसमें कोई शक नहीं था कि मुंबई हमले में लश्करे-ए-ताइबा का हाथ था। हमें यह भी पता था कि पाकिस्तान में इस आतंकी संगठन समेत अन्य को संरक्षण मिल रहा है।
पूर्व सीआईए निदेशक ने तत्कालीन परवेज मुशर्रफ को लेकर लिखा है कि उन्होंने कई जरूरी सबूत मुहैया करने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।