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क्या नवाज शरीफ सिर्फ जेल जाने के लिए वतन वापस आए थे या बात कुछ और है ?

Sat, 14 Jul 2018 01:31 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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नवाज शरीफ (फाइल फोटो)
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम नवाज ने रावलपिंडी के उच्च सुरक्षा वाले अदियाला जेल में पहली रात गुजारी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों वीआईपी दोषियों के लिए जेल में 'बी' क्लास की सुविधाएं मुहैया कराई गईं थीं। बता दें कि जेल में क्लास 'बी' की सुविधाएं उन कैदियों को मुहैया कराई जाती हैं, जो सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित, शिक्षा या जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे होते हैं।
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नवाज शरीफ और मरियम नवाज दोनों शुक्रवार को लंदन से पाकिस्तान वापस लौटे। नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) की टीम ने दोनों को एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान लाहौर में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ था। एयरपोर्ट के पास नवाज शरीफ के समर्थक उग्र हो गए थे। साथ ही लाहौर सहित कई जगहों पर उन्होंने पत्थरबाजी भी की थी, जिसमें करीब 20 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।


ज्ञात हो कि भ्रष्टाचार की कमाई से लंदन में 4 आलीशान फ्लैट खरीदने के मामले में पाकिस्तान की अकाउंटेबिलिटी कोर्ट ने उन्हें 10 साल जेल की सजा सुनाई है। इस मामले में उनकी बेटी मरियम नवाज और दामाद मोहम्मद सफदर को भी कोर्ट ने दोषी माना है और उन्हें भी क्रमश: सात साल और एक साल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा नवाज शरीफ पर करीब 73 करोड़ रुपये और मरियम नवाज पर 18 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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इन सबके बीच सबसे बड़ी बात ये है कि आखिर नवाज शरीफ लंदन से क्यों लौटे और उन्होंने यहीं समय क्यों चुना अपनी गिरफ्तारी के लिए, जबकि कई पाकिस्तानी नेताओं ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेशों में शरण ले रखा है। शरीफ के ऐसा करने के पीछे कई कारण हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं-
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1. यह 25 जुलाई को होने वाले पाकिस्तान के आम चुनावों से पहले शरीफ द्वारा खेला गया एक जुआ है जो उनके राजनीतिक करियर को बना भी सकता है या उसपर ब्रेक भी लगा सकता है।

2. नवाज शरीफ की पाकिस्तान वापसी से उनके पार्टी कार्यकर्ताओं में एक बार फिर से जोश आ गया है, जो अब तक ठंडे पड़े हुए थे। ऐसे में चुनाव के लिहाज से ये एक अच्छा संकेत है।

3. उनकी पार्टी देश में उनके बिना कोई भी सफल अभियान नहीं चला सकी है। लेकिन अब उनके आ जाने से पार्टी नेताओं में भी जोश आ गया है।

4. विरोधियों को सही जवाब देने का उनके पास यहीं एकमात्र तरीका था कि वो इससे भाग नहीं रहे हैं बल्कि इसका सामना कर रहे हैं।  

5. वह पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की पार्टी की तरह ही सहानुभूति वोट बटोरना चाहते हैं। 2008 में जब बेनजीर भुट्टो की हत्या हुई थी, उस समय उनकी पार्टी ने सहानुभूति वोट के जरिए भारी मतों से जीत हासिल की थी।

6. उनका मानना है कि उनके खिलाफ आरोप कमजोर हैं और अगर सही तरीके से जांच करवाई जाए तो वो इन आरोपों से बरी भी हो सकते हैं।
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