अपने पुराने रुख से यू-टर्न लेते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रजा परवेज अशरफ मंगलवार को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र लिखने को राजी हो गए। अशरफ अपने खिलाफ अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए और मामले की सुनवाई कर रही पीठ को यह जानकारी दी।
उन्होंने अदालत को बताया कि इसके लिए कानून मंत्रालय को निर्देश दिए जा चुके हैं। पाकिस्तान सरकार इस मामले में लंबे समय से स्विस अधिकारियों को पत्र लिखने से इनकार करती रही है। इसी मामले में अयोग्य ठहराए जाने के बाद यूसुफ रजा गिलानी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। उनके बाद पद संभालने वाले अशरफ पर भी स्विस अधिकारियों को पत्र लिखने के लिए अदालत की ओर से खासा दबाव है।
अशरफ ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि सरकार राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले बंद करने के लिए स्विस अधिकारियों को लिखे पूर्व अटॉर्नी जनरल का पत्र रद्द कर देगी। इस कदम से जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले फिर से खोलने की राह प्रशस्त हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 25 सितंबर तक स्थगित कर दी और प्रधानमंत्री को अगली सुनवाई में खुद पेश होने से छूट भी दे दी।
न्यायमूर्ति आसिफ सईद खोसा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष अशरफ ने कहा कि उन्होंने विधि मंत्री फारूक नाइक को आदेश दिए हैं कि वर्ष 2007 के आखिर में पूर्व अटॉर्नी जनरल मलिक कयूम द्वारा लिखा गया पत्र रद्द कर दिया जाए। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के शासनकाल के दौरान लिखा गया पत्र रद्द किए जाने के बाद स्विस अधिकारी यह तय कर सकेंगे कि जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले फिर से खोले जाने चाहिए या नहीं।
राष्ट्रपति के खिलाफ मामले फिर से खोलने के मुद्दे पर इस बार पाकिस्तान सरकार के तेवर न्यायपालिका के सामने नर्म प्रतीत हुए। पूर्व में सरकार ने राष्ट्रपति के खिलाफ मामले फिर से खोलने से इंकार करते हुए कहा था कि राष्ट्रपति को छूट मिली हुई है और उन पर पाकिस्तान या विदेश में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इस मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को जून में पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट दिसंबर 2009 से राष्ट्रपति के खिलाफ मामले फिर से खोलने के लिए सरकार पर दबाव डाल रहा है। दिसंबर 2009 में ही सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में माफी के लिए पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ द्वारा जारी अध्यादेश भी रद्द कर दिया था। इस अध्यादेश से जरदारी तथा 8000 अन्य लोगों को फायदा हुआ था। पीठ ने प्रधानमंत्री से कहा कि नवीनतम घटनाक्रम के बारे में स्विस अटॉर्नी जनरल को सूचित करने के बाद उसे औपचारिक तौर पर अवगत कराया जाना चाहिए।
इसके अलावा पीठ ने यह भी कहा कि सरकार को उस पत्र का प्रारूप सुप्रीम कोर्ट को बताना चाहिए जो पत्र स्विस अधिकारियों को भेजा जाना है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में और अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और सरकार को दो या तीन दिन के अंदर पत्र के प्रारूप को अंतिम रूप दे देना चाहिए।
क्या है मामला
वर्ष 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ ने नेशनल रीकांसिलेशन आर्डिनेंस (एनआरओ) के जरिए करीब आठ हजार लोगों पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामले को खत्म कर दिए थे। इसका लाभ पाकिस्तान के वर्तमान राष्ट्रपति जरदारी और गृह मंत्री रहमान मलिक को भी मिला था। वर्ष 2008 में स्विस प्रशासन ने पाक सरकार की अपील पर जरदारी के खिलाफ छह करोड़ डॉलर की हेराफेरी के मामले को बंद कर दिया था। दिसंबर 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्यादेश को खारिज करते हुए जरदारी समेत सभी के खिलाफ मामले फिर से खोलने के निर्देश दिए थे।
गिलानी को छोड़ना पड़ा था पद
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को दोबारा शुरू करने के लिए स्विस अधिकारियों को पत्र लिखने का कोर्ट का आदेश नहीं मानने के कारण प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था।