पाकिस्तान में न्यायाधीशों को ‘माई लॉर्ड’ या ‘योर लॉर्डशिप’ कहकर संबोधित करने तथा उनके समक्ष झुकने जैसी परंपरा को चुनौती देने वाली याचिका को लाहौर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति नसीर सईद शेख ने मंगलवार को अपना आदेश सुनाया। हालांकि उन्होंने अपने संक्षिप्त आदेश में याचिका खारिज करने का कोई कारण नहीं बताया।
हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एके डोगर की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। डोगर लश्कर-ए-तोयबा के संस्थापक हाफिज सईद के वकील हैं। उच्च न्यायालय के आदेश पर एक वरिष्ठ वकील ने प्रतिक्रिया में कहा, ‘हमारे न्यायाधीश मामलों की सुनवाई के दौरान अक्सर उपदेश देते हैं जो सुर्खियां बनती हैं लेकिन वे ‘माई लॉर्ड’ कहलाना पसंद करते हैं और चाहते हैं कि लोग उनके सामने झुकें।’
डोगर ने 1981 के राष्ट्रपति आदेश का हवाला दिया जिसमें ‘माई लॉर्ड’ या ‘योर लार्डशिप’ खत्म कर ‘सर’, ‘जनाब ए वाला’ या ‘जनाब ए आली’ आदि संबोधन शुरू करने की बात कही गयी है। उन्होंने इन चीजों को गुलाम मानसिकता का तत्व करार दिया। उनका यह भी कहना था कि किसी भी मानव के सामने झुकना गैर इसलामी है।