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पाक में आर्थिक गलियारे के विरोध से घबराया चीन, नेताओं की खुशामद में जुटा

Thu, 20 Oct 2016 06:56 AM IST
एजेंसी/इस्लामाबाद
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भारत द्वारा पाक में चीन के सहयोग से बन रहे अरबों डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का शुरू से विरोध किया जाता रहा है। इस बीच पाकिस्तान में भी इसका जबरदस्त विरोध देखते हुए चीन घबरा गया है। 
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पाक सांसदों द्वारा इस गलियारे को ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा अनुभव बनने की आशंका जताने के ठीक बाद चीन के राजदूत ने तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान से मुलाकात की। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक चीन ने इमरान खान से आश्वासन लिया है कि उनकी पार्टी नवाज शरीफ के विरोध प्रदर्शनों में गलियारे को निशाना नहीं बनाएगी। 

दो दिन पहले पूर्व क्रिकेटर से नेता बने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान द्वारा एक वीडियो पोस्ट किया गया था। इस वीडियो में इमरान ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को कहा था कि वह डर जाएं। 
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इमरान खान से की चीनी राजदूत ने मुलाकात

लेकिन इस वीडियो से सिर्फ नवाज और उनकी पार्टी ही नहीं बल्कि कुछ और लोग भी घबरा गए हैं, जिनमें चीन खासतौर पर शामिल है। चीन के राजदूत वेईडोंग ने यह मुलाकात करते हुए खान से आश्वासन लिया कि उनकी पार्टी 2 नवंबर को ‘इस्लामाबाद पर कब्जा करो’ के नारे के साथ शुरू होने वाले शरीफ विरोधी प्रदर्शन में आर्थिक गलियारे पर कोई सवाल खड़े नहीं करेगी। 

एक अन्य पाकिस्तानी अखबार ‘दि नेशन’ के मुताबिक यह मुलाकात इमरान के ‘बनी गाला’ स्थित इस्लामाबाद के घर में मंगलवार रात को हुई। उल्लेखनीय है कि चीन 51 अरब डॉलर की रकम खर्च करके चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) बनाने जा रही है। 

इमरान खान शरीफ के गैर जिम्मेदाराना रवैये के खिलाफ राजधानी इस्लामाबाद को पूरी तरह बंद करना चाहते हैं। यह विरोध कश्मीर मामले में कोई कार्रवाई नहीं किए जाने तथा पनामा पेपर लीक मामले को लेकर किया जा रहा है। 

लेकिन चीन को डर है कि शरीफ का विरोध करते हुए इमरान इस गलियारे पर भी पीएम को निशाना बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो जन विरोध के चलते पाकिस्तानी आवाम गलियारे के निर्माण में बड़ी बाधा खड़ी कर सकती है।
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क्या है चीन-पाक आर्थिक गलियारा

पाक में बलूचिस्तान के ग्वादर से शुरू होकर यह गलियारा चीन के मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित काशगर तक जाएगा। यह गलियारा चीन-पाकिस्तान के बीच यातायात व ऊर्जा का मिला-जुला प्रोजेक्ट है। इसके तहत समुद्र में बंदरगाह भी विकसित होगा जो भारतीय हिंद महासागर तक चीन की पहुंच बना देगा। यह रास्ता चीन को मध्य-पूर्व व अफ्रीका तक पहुंचने के लिए छोटा रास्ता उपलब्ध कराएगा, जहां हजारों चीनी कंपनियां कारोबार कर रही हैं। 

चीन और पाक में विरोध के स्वर
चीन का काशगर प्रांत शिनझियांग इलाके में पड़ता है जहां 1990 से ही अलगाववादी आंदोलन चल रहा है। हाल ही के दिनों में यहां बढ़ी हिंसा के लिए चीन अलगाववादी आतंकियों को जिम्मेदार ठहराता है। इसके अलावा यह गलियारा पाक के तालिबानी इलाकों से होकर जाएगा जहां हमलों दोनों देशों की सरकारों को हमलों का शक है। इसके दूसरे छोर पर बलूचिस्तान का ग्वादर क्षेत्र है जहां बलूच आंदोलन के तहत इसका विरोध जारी है। 

भारत इसलिए करता है विरोध
यह गलियारा पाक अधिकृत कश्मीर से होते हुए निकलता है जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है। इसीलिए भारत इस गलियारे के निर्माण को गैर कानूनी मानते हुए इसका विरोध करता रहा है। यह आशंका भी है कि इस गलियारे से चीन पाकिस्तान को भारत के खिलाफ सैन्य साजो सामान आसानी से मुहैया करा सकता है। दूसरी तरफ दक्षिण चीन सागर से ग्वादर बंदरगाह जुड़ जाने के बाद भारत को कई परेशानियां चीन पेश कर सकता है।
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