'जिसे लोग मसीहा कहते हैं'
यरुशलम का इतिहास बयान करते हुए जोजेफ एक यहूदी पेशवा अनानूस बिन अनानूस का जिक्र करते हैं जिसने जेम्स नाम के एक शख़्स को पत्थरों से मरवा डाला। हालांकि, उस दौर में जेम्स बहुत आम नाम था इसलिए जोजेफ ने स्पष्ट करने के लिए लिखा, 'जेम्स, ईसा का भाई, जिसे लोग मसीहा कहते हैं।'
बेहद छोटा ही सही लेकिन यह इतिहास में हजरत ईसा मसीह का पहला जिक्र है। इससे जाहिर होता है कि जोजेफ के खयाल में हजरत ईसा उतने जाने पहचाने थे और उनके मसीहा होने की कल्पना इतनी आम थी कि उसे उम्मीद थी कि इस कदर छोटा जिक्र करने भर से उसके पाठकों को जेम्स की पहचान का पता चल जाएगा।
इसी जोजेफ ने एक और जगह हज़रत ईसा का विस्तार से जिक्र किया है। जिसमें उनके सूली पर चढ़ाए जाने और दोबारा उठाए जाने का वर्णन है लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ये हिस्सा तोड़ा-मरोड़ा गया है और इसे इसाई समर्थकों ने सदियों बाद अपनी तरफ़ से शामिल कर लिया है। हजरत ईसा जिस जगह पैदा हुए और पले-बढ़े वह मूर्ति उपासक रोमनों के प्रभाव में थी और रोमनों ने ही उन्हें सूली पर चढ़ाया था।
हालांकि, इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक उनकी शक्ल का एक शख़्स सूली पर चढ़ाया गया था। उस जमाने में रोमन सुपर पावर का दर्जा रखते थे और वहां ज्ञान और कला ने ख़ासी तरक़्क़ी की थी, और इतिहास की किताबें लिखी जा रही थीं। तो क्या उन्होंने पहली सदी ईस्वी में हजरत ईसा का जिक्र किया है? इसका जवाब है एक नहीं कई बार।
क्या सुलूक किया जाए?
पहला जिक्र प्लिनी खोर्द के लेखन में मिलता है। उनके चाचा को प्लिनी बुज़ुर्ग कहा जाता है और वह अग्रणी वैज्ञानिक और दार्शनिक हैं। प्लिनी खोर्द रोमन दरबार से सम्बद्ध थे और उन्होंने इस हैसियत से 247 पत्र लिखे हैं जो बहुत मशहूर हुए और उनसे इस दौर के बहुत से मामलों पर रोशनी पड़ती है।
उनमें से हमारे मतलब का जो पत्र है उसका नंबर दसवां है। प्लिनी सन 112 (यानी ईसा के तकरीबन 79 साल बाद) में इस इलाके के गवर्नर थे जो आज कल तुर्की में शामिल है। एक पत्र में प्लिनी रोमन बादशाह ट्रेजन को खत लिखकर मार्गदर्शन मांगते हैं कि उनके इलाक़े में जो एक नया संप्रदाय ईसाइयत के नाम से आया है, उसके अनुयायियों के साथ क्या सुलूक किया जाए।
वह पूछते हैं कि अगर कोई ईसाई मेरे सामने आकर हमारी मूर्तियों की पूजा करे और हजरत ईसा को बुरा भला कहे तो क्या उसे माफ कर दिया जाए? यह रोमन काल में ईसा का पहला जिक्र है जो हम तक पहुंचा है। इसके बाद हम एक और रोमन इतिहासकार सोई टूनिएस की किताब 'सीज़र की जीवनी' का अध्ययन करते हैं जो सन 115 में लिखी गई थी।
इस किताब में उल्लेख है कि रोमन बादशाह क्लॉडिएस के दौर (सन 41 से 54) में तमाम यहूदियों को रोम से निकाल दिया गया था क्योंकि वह 'क्रिस्तोस' के उकसाने पर शहर में दंगा कर रहे थे। विशेषज्ञों के मुताबिक़ यहां क्रिस्तोस का मतलब क्राइस्ट यानी हजरत ईसा से है। वहीं, सोई टूनिएस ने हजरत ईसा का नाम यूनानी भाषा में गलत लिखा है, यानी Christus की जगह Chrestus।