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अमेरिका के साथ पहले गतिरोध के बाद नरम पड़े इमरान खान के तेवर, यह हैं दो कारण

Fri, 31 Aug 2018 02:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
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इमरान खान-माइक पॉम्पियो
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पाकिस्तान की नव-निर्वाचित इमरान खान सरकार ने अमेरिका के साथ हुए अपने पहले गतिरोध के बाद अपने सुर नरम कर लिए हैं। दरअसल दोनों देशों के बीच पिछले हफ्ते अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी किए बयान को लेकर विवाद पैदा हो गया था। माइक पॉम्पियो ने कहा था कि खान के साथ बातचीत में उन्होंने आतंकवाद पर कार्रवाई करने के लिए कहा जबकि पाकिस्तान के विदेश मंत्री फैजल का कहना था कि इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई। केवल इतना ही नही पाक ने अमेरिका से अपने बयान को ठीक करने के लिए कहा था।

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अब माना जा रहा है कि इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ अपनी अमेरिकी विरोधी भावना में कमी लाएगी। पाकिस्तान इस समय बहुत ही ज्यादा आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे में उसे अमेरिका और अतंरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सहायता चाहिए। खान के नरम पड़े तेवरों के दो कारण है। पहला, अगले हफ्ते अमेरिका के विदेश मंत्री पाकिस्तान के दौरे पर आने वाले है। जिसे पाकिस्तान उत्पादक बनाना चाहता है क्योंकि पिछले एक साल से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को मिलने वाली 1 बिलियन डॉलर की सहायता राशि को भी कम कर दिया था और कहा था कि वह लगातार झूठ बोल रहा है और अपने देश में आतंकवाद को खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। दूसरी वजह अमेरिका ने पाक के साथ रिश्ते सामान्य करने की पहल की। पॉम्पियो और खान के बीच हुई बातचीत इसी का नतीजा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि राजनीतिक तौर पर हम आगे बढ़ना चाहते हैं।
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पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनयिक ने डॉन के साथ हुई बातचीत में कहा कि यह सोचना गलती होगी कि पॉम्पियो सौहार्दपूर्ण यात्रा पर आ रहे हैं। अमेरिकन हमारे इस्लामाबाद की सरकार के साथ रणनीतिक मुलाकात करने आ रहे हैं। हम अपने संबंधों में सुधार चाहते हैं। पाकिस्तानी दौरे पर पॉम्पियो के साथ ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी जनरल जोसफ एफ डुनफोर्ड भी होंगे।

इससे पहले जेम्स मैटिस ने मंगलवार को पेंटागन में संवाददाताओं से कहा था, ‘विदेश मंत्री और अध्यक्ष इस्लामाबाद में नयी सरकार से मुलाकात के लिये जा रहे हैं।’ डॉन अखबार ने उन्हें उद्धृत करते हुए कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत का ‘प्रमुख हिस्सा’ आतंकवाद से लड़ने की जरूरत होगा। इस ब्रीफिंग में डुनफोर्ड भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ‘दक्षिण एशिया में स्थायी रूचि’ है और वह चाहता है कि ‘क्षेत्र में प्रभाव के लिये मौजूदगी (वहां) बरकरार रखी जाए।’

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