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Pakistan: 20 हजार पत्रकारों में से पांच फीसदी से भी कम महिलाएं, हिंसा की धमकियों का कर रहीं सामना

Tue, 30 Aug 2022 06:28 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तानी पत्रकार के अनुसार, "पाकिस्तानी मीडिया में महिलाओं का ऑन स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है। महिलाओं को अपनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।"
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पाकिस्तान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पाकिस्तान में महिला कर्मचारियों के साथ लिंग के आधार पर वेतन में अंतर, लिंग पूर्वाग्रह और अनुचित व्यवहार बड़े पैमाने पर है। दक्षिण एशियाई देश में पत्रकार के रूप में काम करने वाली महिलाओं की स्थिति भी दुनिया के लिए कोई रहस्य नहीं है। 
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रेटिंग में पाकिस्तान लगातार निचले स्थान पर रहा है। ऑनलाइन स्पेस में भी यह निचले स्तर पर है। महिलाओं को खास तौर पर उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का खामियाजा भुगतना पड़ता है। पाकिस्तान में सख्त पितृसत्तात्मक सामाजिक मानदंडों के कारण महिला पत्रकारों को हिंसा और धमकियों का जोखिम और अधिक खतरा है। 

एक पाकिस्तानी पत्रकार के अनुसार, "पाकिस्तानी मीडिया में महिलाओं ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रिपोर्टिंग की संवेदनशीलता और लेखन का सत्यनिष्ठ तरीका महिलाओं की प्रगति का प्रतीक है। इस अहम बदलाव के बावजूद ऑन स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है। महिलाओं को अपनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।"
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महिला पत्रकारों को दी जाने वाली बीट्स की प्रकृति में भी एक मजबूत लिंग-पूर्वाग्रह रहा है। पर्यावरण, मौसम, स्वास्थ्य जैसी बीट्स की प्रकृति 'नरम' मानी जाती है, जबकि उन्हें अभी भी राजनीति, खेल, अपराध और अर्थव्यवस्था को कवर करने में 'अक्षम' माना जाता है। 

पाकिस्तान के एक प्रमुख अखाबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी सामान्य और मुश्किल वजह एक ही है-लिंग आधारित रूढ़िवादिता। सामान्य इसलिए क्योंकि लिंग के आधार पर महिलाओं के आधार पर क्षमताओं की निंदा करना आसान है और मुश्किल इसलिए क्योंकि अवसर दिए जाने पर इसे पहली बार में सही ढंग से करने का दबाव अधिक हो जाता है। 

रिपोर्ट में मीडिया वॉचडॉग फ्रीडम नेटवर्क की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए लेखक ने कहा कि मीडिया इंडस्ट्री में सीनियर मैनेजमेंट के पदों पर महिलाओं की संख्या बहुत कम है, जो पाकिस्तान में पत्रकार की महिला के रूप में पहचान करते हैं।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि अनुमानित 20,000 पाकिस्तानी पत्रकारों में से 5 प्रतिशत से भी कम महिलाएं हैं। हालांकि हाल की बहसों (डिबेट्स) और चर्चाओं (डिस्कशंस) ने कार्यस्थल (वर्कप्लेस) पर उन महिलाओं की सुरक्षा के बारे में महत्वपूर्ण बहस पैदा की है जो जमीन पर रिपोर्टिंग या ऑफिस में काम कर रही हैं। इन बहसों ने महिलाओं के काम करने के अनुभव, उनकी सुरक्षा और कार्यस्थलों में मौजूद कुप्रथा को पारदर्शिता प्रदान की है, जो उनकी प्रोडक्टिविटी के लिए एक चुनौती है। 

ऑनलाइन स्पेस भी सुरक्षित नहीं है। दैनिक आधार पर अपने व्यक्तिगत डेटा को सार्वजनिक रूप से प्रकट करने पर महिला पत्रकारों को बलात्कार, शारीरिक हिंसा और धमकी के रूप बड़ी संख्या में खतरों का सामना करना पड़ता है।  
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