पीटीआई मार्च के दौरान पाकिस्तान में हिंसा
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पाकिस्तान एक बार फिर राजनीतिक अराजकता के माहौल में फंस गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और सरकार के बीच ठनी हुई है। पीटीआई ने अपने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल से रिहा कराने के लिए राजधानी इस्लमाबाद में मार्च का एलान किया है। इस विरोध का एलान इमरान की पत्नी बुशरा बीबी ने किया था। पीटीआई कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जब मंगलवार को इस्लमाबाद में घुसने की कोशिश तो उनकी सुरक्षा बलों के साथ हिंसक भिड़ंत हो गई। पीटीआई का दावा है कि पुलिस ने छह कार्यकर्ताओं की गोली मारकर हत्या कर दी और सैकड़ों समर्थक गिरफ्तार किए हैं। इस हिंसा में पाकिस्तान के तीन सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और 100 से ज्यादा घायल हैं।
आइये जानते हैं कि पाकिस्तान में क्या हो रहा है? पीटीआई ने मार्च क्यों बुलाया है? प्रदर्शनकारियों की मांग क्या है? प्रदर्शन कब तक जारी रहेगा? आगे क्या होगा? इमरान खान क्या कह रहे हैं? हिंसा पर पाकिस्तानी सरकार का क्या रुख है?
पाकिस्तान में क्या हो रहा है?
इस पूरे बवाल की जड़ में इमरान की पार्टी पीटीआई का प्रस्तावित संसद मार्च है। इस विरोध का मकसद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को रिहा कराने का है जो डेढ़ साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं। दरअसल, पूर्व पीएम इमरान की पत्नी बुशरा बीबी और उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की संसद के पास एक बड़े चौराहे 'डी-चौक' पर धरना देने की योजना बनाई थी। इसी योजना के तहत रविवार को पेशावर शहर से प्रदर्शनकारियों को ले जाने वाले वाहनों का एक काफिला एक लंबे मार्च के तहत रवाना हुआ। इस काफिले को पेशावर से लगभग 180 किलोमीटर दूर राजधानी तक पहुंचना था।
हालांकि, पीटीआई की रैली को देखते हुए दो दिन के लिए सुरक्षा लॉकडाउन और रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इन पाबंदियों को धता बताते हुए प्रदर्शनकारी इस्लामाबाद के बाहरी इलाकों में पहुंच गए। रास्ते में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए शिपिंग कंटेनरों से सड़कें बंद कर दीं।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का मार्च।
- फोटो : X/PTIOfficial
मार्च के दौरान क्या-क्या हुआ?
मार्च राजधानी तक पहुंच पता इससे पहले कई इलाकों में अराजकता का माहौल बन गया। मार्च से जुड़े वीडियो सामने आए जिसमें एक पुलिस चौकी को आग लगाते हुए और हाईवे पर कई जगहों पर आग लगाते हुए दिखाया गया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि इस्लामाबाद के बाहर और पंजाब प्रांत में अन्य जगहों पर 22 पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। वहीं एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शनों में चार सुरक्षा अधिकारियों सहित कम से कम छह लोग मारे गए।
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों ने मंगलवार को सीएनएन को बताया कि पांच लोगों की मौत हो गई है, जिनमें चार सुरक्षा अधिकारी और एक नागरिक शामिल हैं।
मंगलवार की सुबह प्रदर्शनकारियों ने शहर की सीमा को फांदकर डी-चौक तक मार्च किया। उधर बिगड़ते हालात देख पाकिस्तानी सरकार ने सेना को बुलाया है और सैनिकों को संसद, सुप्रीम कोर्ट और सचिवालय सहित प्रमुख सरकारी भवनों के बाहर तैनात किया गया है।
आधी रात को सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए अभियान चलाया की और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, बुधवार को पीटीआई ने 'सरकार की क्रूरता' बताते हुए अपने विरोध प्रदर्शन को फिलहाल वापस ले लिया।
पीटीआई समर्थक विरोध करते।
- फोटो : एक्स/पीटीआई
हिंसा पर पाकिस्तान सरकार क्या कह रही है?
पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री नकवी ने कहा कि सुरक्षा बलों को गोलियां लगी हैं, लेकिन पुलिस प्रदर्शनकारियों के साथ संयम दिखा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारी सीमा पार करते हैं तो सुरक्षा बलों को जवाबी गोलीबारी करने का अधिकार दिया गया है और वे कर्फ्यू लगाने जैसे अतिरिक्त कदम भी उठा सकते हैं।
रैली को देखते हुए रेड जोन क्षेत्र की ओर जाने वाली अवरुद्ध सड़क पर अर्धसैनिक बल के जवान पहरा दे रहे हैं। मंत्री नकवी ने कहा, 'अर्धसैनिक रेंजर्स गोलियां चला सकते हैं और पांच मिनट के बाद वहां कोई प्रदर्शनकारी नहीं होगा। यहां पहुंचने वाले किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।'
संघीय सूचना मंत्री अत्ता तरार ने कहा कि रेड जोन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तानी सेना को बुलाया है। पाकिस्तान मीडिया ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत उपद्रवियों और उपद्रवियों से सख्ती से निपटने के लिए सेना को बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि देखते ही गोली मारने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
पीटीआई की रैली, इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था।
- फोटो : एक्स/पीटीआई
इमरान की पार्टी का क्या कहना है?
पीटीआई ने सरकार पर अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है और कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं। उसने कहा कि करीब दो दर्जन प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। हाल के दिनों में पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में हजारों इमरान खान समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है क्योंकि अधिकारियों ने विरोध मार्च को रोकने की कोशिश की थी।
इमरान खान ने अपने समर्थकों से कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे डटे रहें। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने समर्थकों से कहा, 'सभी प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी शांतिपूर्ण, एकजुट रहें और तब तक डटे रहें जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। यह पाकिस्तान के अस्तित्व और सच्ची आजादी के लिए संघर्ष है।'
इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी अपनी बात पर अड़ी हुई हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से संवेदनशील स्थान पर नियंत्रण करने की बात कही है। बुशरा बीबी ने समर्थकों के सामने शपथ ली कि जब तक उनके पति रिहा नहीं हो जाते, वे कार्यक्रम स्थल पर ही रहेंगे।
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई)
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पाकिस्तान में विरोध क्यों हो रहा है?
प्रदर्शनकारी इमरान खान और अन्य 'राजनीतिक कैदियों' की रिहाई की मांग कर रहे हैं। वे एक नए संवैधानिक संशोधन को भी निरस्त करना चाहते हैं, जिसने सरकार को उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को चुनने और राजनीतिक मामलों की सुनवाई के लिए उन न्यायाधीशों को चुनने की शक्ति बढ़ा दी है।इमरान खान के समर्थकों का भी मानना है कि फरवरी 2024 में हुए चुनाव स्वतंत्र या निष्पक्ष नहीं थे और उन्होंने इसे 'चुराया हुआ जनादेश' कहा।
इमरान खान को 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के बाद पद से हटा दिया गया था। उसके बाद से इमरान ने प्रधानमंत्री शरीफ के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, जिसमें उन्होंने सरकार पर उन्हें पद से हटाने के लिए सेना के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया है।
पूर्व स्टार क्रिकेटर से नेता बने डेढ़ वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं और भ्रष्टाचार से लेकर सरकारी गुप्त दस्तावेजों को लीक करने तक के आरोपों पर दर्जनों आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। हालांकि, इमरान और उनकी पार्टी इन तमाम आरोपों से इनकार करते हैं।
इमरान ने बार-बार अपने समर्थकों से उनकी रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने का आग्रह किया है और कई शहरों में हिंसा भड़क उठी है। अक्तूबर की शुरुआत में इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से इस्लामाबाद तक मार्च निकाला गया था। इस मार्च के दौरान भी इसी तरह सड़क अवरोध, मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बाधित की गईं और पुलिस के साथ झड़पें हुईं।