पाकिस्तान के नापाक मंसूबों पर भारतीय सेना के पराक्रम का असर दिखने लगा है। भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बड़े भाई नवाज शरीफ ने कूटनीतिक रास्ता अपनाने की नसीहत दी है। पाकिस्तानी मीडिया की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की खबर में कहा गया, भारत की ओर से सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले के बाद नवाज शरीफ लंदन से पाकिस्तान लौटे, ताकि वह प्रधानमंत्री शहबाज की मदद कर सकें। खबर में कहा गया, पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में हुए फैसलों की जानकारी मिलने के बाद नवाज शरीफ ने कहा कि स्थिति को बातचीत और शांति के रास्ते से सुलझाया जाना चाहिए।
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नवाज ने कहा कि वह नहीं चाहते हैं कि सरकार कोई आक्रामक कदम उठाए। उन्होंने सुझाव दिया कि पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली सरकार को सभी उपलब्ध कूटनीतिक तरीकों का उपयोग कर शांति कायम करने की कोशिश करनी चाहिए।
खबर में कहा गया, नवाज शरीफ पहले भी भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने की पैरवी कर चुके हैं। पहले उन्होंने कहा था कि 1999 में उनकी सरकार इसलिए हटाई गई क्योंकि उन्होंने कारगिल युद्ध का विरोध किया था। एक अन्य पाकिस्तानी मीडिया संस्थान न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक,नवाज शरीफ ने कहा था कि उनकी पार्टी ने हमेशा अच्छा काम किया, लेकिन उसे सत्ता से बाहर कर दिया गया।
उन्होंने कहा था, मैं जानना चाहता हूं कि मेरी सरकारों को 1993 और 1999 में क्यों गिराया गया? क्या इसलिए कि हमने कारगिल युद्ध का विरोध किया था? नवाज शरीफ की सरकार को 12 अक्तूबर 1999 को सैन्य तख्तापलट के जरिए हटा दिया गया था।
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पिछले साल नवाज शरीफ इस बात को कबूल किया था कि 1999 में पाकिस्तान ने भारत के साथ हुए एक समझौते का उल्लंघन किया था। उन्होंने कहा था, 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने पांच परमाणु परीक्षण किए। इसके बाद वाजपेयी साहब पाकिस्तान आए और हमारे साथ एक समझौता किया। लेकिन हमने उस समझौते का उल्लंघन किया...यह हमारी गलती थी।
यह समझौता 'लाहौर घोषणा' था, जिस पर नवाज शरीफ और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 21 फरवरी 1999 को हस्ताक्षर किए थे। लेकिन इसके तुरंत बाद पाकिस्तान की सेना ने कारगिल में घुसपैठ कर दी थी, जिससे कारगिल युद्ध हुआ।