दरिंदगी के मामले में करीब साढ़े छह महीने पहले हुए इस मामले में 50 से ज्यादा गवाह पेश किए। इनकी गवाही के आधार पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। दोषियों को कैंप जेल से कोट लखपत जेल भेजा जाएगा, जहां उन्हें मौत की सजा दी जाएगी।
क्या था पूरा मामला
पिछले साल 9 सितंबर को महिला अपने बच्चों के साथ जा रही थी। लाहौर-सियालकोट हाईवे पर एक टोल प्लाजा पार करते ही पेट्रोल खत्म हो गया। बच्चों के बाद सूनसान में फंसी महिला ने मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन मामले में दोषी आबिद माल्ही और शफकत अली ने बंदूक की नोक पर महिला को बच्चों के सामने ही अपनी हवस का शिकार बना डाला था। दरिंदगी के बाद दोषियों ने महिला से रुपये, गहने, एटीएम और मोबाइल भी छीन लिया था।
इमरान को बदलना पड़ा कानून
इस घटना को लेकर पाकिस्तान में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे। लोगों ने सरकार से जवाब मांगना शुरू कर दिया था। लोगों के रोष को शांत करने के लिए पाकिस्तान के आतंकवाद रोधी अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी कुर्सी पर खतरा आता देख ‘सख्त’ कार्रवाई करने का भरोसा जताया था। इसके बाद कानून पास किया गया कि दुष्कर्मियों का बधियाकरण कर दिया जाएगा। इस कानून के मसौदे में पुलिस में महिलाओं की भूमिका बढ़ाना, दुष्कर्म मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और गवाहों की सुरक्षा जैसी चीजों को शामिल किया गया।