पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के 17 लाख शरणार्थियों व अवैध रूप से रह रहे सभी प्रवासियों को 31 अक्तूबर तक देश छोड़ देने की योजना पर अमल करने का फैसला किया है। इस फैसले को पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप बता रहा है।
वहीं देश के इस फैसले की आलोचना हो रही है। एमनेस्टी और यूएन समेत कई वैश्विक संगठनों ने निंदा की है और सरकार से इसपर पुनर्विचार करने को कहा है। वहीं काबुल में तालिबान सरकार ने भी इस कदम पर आपत्ति जताई है।
शरणार्थियों में डर का माहौल
इधर, इस फैसले के बाद पाकिस्तान में रह रहे शरणार्थियों के बीच डर का माहौल देखा जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर अफगानी आबादी वाले दो इलाकों में कई युवा और मध्यम आयु वर्ग के शरणार्थियों के पास पुलिस के साथ झड़पों और गिरफ्तारियों के बारे में बताने के लिए दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं।
अफगान बस्ती में समुदाय के प्रमुख हाजी अब्दुल्ला ने समाचार एजेंसी को बताया कि यहां तक कि जिनके पास कानूनी शरणार्थी दर्जा/कार्ड हैं, उन्हें भी पुलिस नहीं बख्श रही है, और पूरे कराची में हमारे लोगों को शातिर तरीके से निशाना बना रहे हैं।
कार्ड भी फाड़ देती है पुलिस
अब्दुल्ला ने कहा कि पुलिस हमारे लोगों से पैसे वसूलने में मस्त रहती है, तब भी जब हमारे शरणार्थी कार्ड वाले लोग उन्हें अपने कार्ड दिखाते हैं, वे फाड़ दिए जाते हैं और हमारे लोगों को पुलिस स्टेशनों में ले जाया जाता है और केवल तभी छोड़ा जाता है जब पुलिस को रिश्वत दी जाती है।
हाजी रहीम, जो समुदाय के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं, ने कहा कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के डर से अधिकांश युवा घर पर ही रह रहे हैं और काम के लिए बाहर नहीं निकल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि हम नहीं जानते कि क्या करें, क्योंकि कानूनी स्थिति वाले शरणार्थियों को भी परेशान किया जा रहा है और पैसे देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सदर में ठेला लगाने वाले और चिप्स बेचने वाले एक व्यक्ति को पुलिस ने उठा लिया था और वह अभी भी जेल में बंद है, क्योंकि उसका परिवार रहीम ने कहा कि मैं पुलिस द्वारा मांगे गए पैसों का इंतजाम नहीं कर सकता।
उस व्यक्ति की पत्नी सानिया नाज़ ने कहा कि उसके पति और भाई दोनों जेल में हैं, इसलिए पांच बच्चों का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। मौजूदा स्थिति के कारण, कई परिवारों ने पहले ही घर लौटने का फैसला कर लिया है और कुछ पहले ही बलूचिस्तान में चमन सीमा के रास्ते सड़क मार्ग से निकल चुके हैं।
रिश्वत के बदले रिहाई
अहमद (एक नाम) जो सोहराब गोथ में एक रेस्तरां चलाता है और अपने लोगों और पुलिस के बीच फिक्सर का काम करता है, ने कहा कि पिछले महीने में, विभिन्न मामलों में लगभग 1,500 अफगानों को गिरफ्तार किया गया था। कई लोगों को रिश्वत देने के बाद रिहा कर दिया गया।