राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) कानूनों में पाकिस्तान की पिछली सरकार द्वारा संशोधन किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री खान ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां पिछले साल सितंबर में तीन सदस्यीय पीठ ने बदलावों को रद्द कर दिया था। इसके बाद संघीय सरकार ने इंट्रा-कोर्ट अपील के माध्यम से फैसले को चुनौती दी थी। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों में बदलाव से संबंधित मामले में गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। हालांकि, अभी इसकी घोषणा की तारीख तय नहीं की गई है। इस मामले के याचिकाकर्ता पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान रावलपिंडी की अदियाला जेल से वीडियो लिंक के माध्यम से अदालत में पेश हुए, जहां वह पिछले साल सितंबर से कैद में हैं।
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बता दें कि राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) कानूनों में पिछली सरकार द्वारा संशोधन किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री खान ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां पिछले साल सितंबर में तीन सदस्यीय पीठ ने बदलावों को रद्द कर दिया था। इसके बाद संघीय सरकार ने इंट्रा-कोर्ट अपील के माध्यम से फैसले को चुनौती दी।
पांच न्यायाधीशों की पीठ ने की सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा के नेतृत्व में न्यायमूर्ति अमीनुद्दीन खान, न्यायमूर्ति जमाल खान मंडोखाइल, न्यायमूर्ति अतहर मिनल्लाह और न्यायमूर्ति सैयद हसन अजहर रिजवी सहित पांच न्यायाधीशों की पीठ ने मामले में संघीय सरकार की इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई की।
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खान को राजनीतिक मामलों को उजागर करने से रोका
पूर्व पीएम खान ने अपने बयान में बार-बार राजनीतिक मामलों को उजागर करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हर बार रोक दिया गया। अदालत ने एनएबी कानूनों के बारे में बात करने के लिए कहा। जाहिर है, वह एनबीए कानूनों में संशोधन के बारे में बात करने के लिए या तो तैयार नहीं थे या दिलचस्पी नहीं रखते थे।
मामले की कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं किया गया
मामले की कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं किया गया, क्योंकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के वकील के औपचारिक अनुरोध के बावजूद अदालत ने पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। वकीलों की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।