पाकिस्तान चुनाव की तारीख पर सहमति बनाने के लिए सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) और प्रमुख विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ने के संकेत हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई बातचीत शुक्रवार को भी जारी रही और अब इसका अगला दौर मंगलवार को होगा। पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक बातचीत पटरी पर है और मंगलवार को दोनों पक्षों में सहमति बन सकती है।
अखबारों में छपी रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्षों के नेताओं ने आम चुनाव के समय के बारे में सहमति बनाने के सवाल को अपने बाकी मतभेदों से अलग रखा है। इससे बातचीत का माहौल बेहतर बन रहा है। बातचीत जारी रहने के बीच ही शुक्रवार रात पंजाब की पुलिस ने प्रांत में पीटीआई के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री परवेज इलाही के निवास पर छापा मारा। यह छापा भ्रष्टाचार के आरोप में मारा गया, लेकिन इलाही वहां नहीं मिले।
बताया जाता है कि पुलिस इलाही को गिरफ्तार करना चाहती थी। छापा आठ घंटों तक चलता रहा। पीटीआई के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस कार्रवाई से माहौल फिर बिगड़ सकता है। अब देखने की बात होगी कि इससे बढ़ी कड़वाहट का मंगलवार को बातचीत के अगले दौर पर क्या असर पड़ता है।
शुक्रवार को बातचीत का दूसरा दिन था। शुक्रवार को भी संसद भवन के अंदर दोनों पक्षों ने बंद कमरे में बातचीत की। दो घंटों की वार्ता के दोनों पक्ष बाहर आए और पत्रकारों को बताया कि अगली बातचीत मंगलवार को होगी। संभव है कि उस दिन बातचीत का आखिरी दौर हो और उसके बाद बातचीत के नतीजे का एलान कर दिया जाएगा। दोनों पक्ष बातचीत के नतीजे को लेकर आशान्वित नजर आए।
सूत्रों के मुताबिक बातचीत के दौरान पीटीआई के नेताओं ने जोर डाला कि नेशनल असेंबली के साथ-साथ सिंध और बलूचिस्तान प्रांत की असेंबलियों को भी मई में भंग कर दिया जाए और उसके बाद एक दिन में नेशनल असेंबली और चारों प्रांतों की असेंबलियों के चुनाव कराए जाएं। पीटीआई ने कहा कि असेंबलियां भंग करने का काम मई के अंत तक पूरा हो जाना चाहिए, ताकि अगस्त तक सारे चुनाव संपन्न हो जाएं। पीटीआई ने कहा कि अगर सरकार एक दिन में सारा चुनाव कराना चाहती है, तो उसे अगले वर्ष का बजट टाल देना चाहिए।
बैठक में शामिल हुए एक नेता ने अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि चुनाव की तारीख के साथ-साथ बजट का मुद्दा भी दोनों पक्षों के बीच गतिरोध का कारण बना हुआ है। लेकिन उस नेता ने कहा कि अब तक बातचीत सद्भावना के माहौल में हुई है, जिससे बातचीत के कामयाब रहने की संभावना बढ़ गई है।
सरकारी पक्ष का कहना है कि असेंबलियों को तुरंत भंग करना संभव नहीं है। ना ही बजट टाला जा सकता है, क्योंकि ऐसा होने पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से ऋण मिलने की गुंजाइश और कम हो जाएगी। सूत्रों के मुताबिक पीटीआई को अंदेशा है कि सरकार लोकलुभावन बजट पेश कर अगले चुनाव में अपने लिए बेहतर माहौल बनाने की कोशिश करेगी, इसलिए पार्टी इसे टालने को अपनी एक प्रमुख मांग बनाए हुए है।