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पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने बलूचों पर की गोलीबारी!: रैली में हिस्सा लेने ग्वादर जा रहे 14 घायल, 200 गिरफ्तार

Sun, 28 Jul 2024 12:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान के अखबार 'द डॉन' के मुताबिक, इस घटना को लेकर सुरक्षाबलों और हमले का शिकार हुए बलूच संगठन- बलूच याकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
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पाकिस्तान में बलूचों पर गोलीबारी। - फोटो : X@BalochYakjehtiC)
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विस्तार
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पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित मास्तंग में शनिवार को बलूचों के एक समूह पर गोलीबारी हुई। इस घटना में 14 लोग घायल हो गए। बताया गया है कि यह समूह ग्वादर में एक रैली में हिस्सा लेने के लिए जा रहा था। इसी दौरान इन पर गोलीबारी हुई। आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने इस समूह को निशाना बनाया है। 
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पाकिस्तान के अखबार 'द डॉन' के मुताबिक, इस घटना को लेकर सुरक्षाबलों और हमले का शिकार हुए बलूच संगठन- बलूच याकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। जहां कलात के डिप्टी कमिश्नर शायक बलोच ने कहा कि संगठन के बेड़े ने मास्तंग के पास लेवियस चेकपॉइंट पर हमला किया तो वहीं बलूच याकजेहती कमेटी के प्रमुख बेबर्ग बलूच ने कहा कि जब वे क्वेटा-कराची हाईवे से जा रहे थे, उसी दौरान सुरक्षाबल के एक अधिकारी ने उनके बेड़े पर गोलीबारी की। 



घायलों को जिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वहां पांच लोगों की हालत गंभीर बताई गई है। इस बीच बेबर्ग बलूच ने कहा कि ग्वादर जा रहे बेड़े को थाना सोना खान इलाके में रोका गया था। वह भी इस बेड़े का हिस्सा था। उन्होंने बताया कि बेड़े को मास्तंग जाने से रोका गया और सुरक्षाबलों ने इसके लिए लाठीचार्ज के साथ-साथ लोगों पर आंसू गैस के गोले तक छोड़े।
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एक्स पर एक पोस्ट में बलूच याकजेहती समुदाय ने कहा कि राज्य की सेना और पुलिस ने उनके शांतिपूर्ण बेड़ों पर हमला किया और मासूम लोगों पर फायरिंग की। बीवाईसी की एक और नेता महरंग बलोच ने कहा कि सुरक्षाबलों ने ग्वादर जा रहे 200 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। हालांकि, सरकार ने इस घटना में बलूच संगठन के दावों को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया। 

सरकार की तरफ से कहा गया है कि बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती या प्रांतीय सरकार की तरफ से पुलिस और सुरक्षाबलों को ऐसा कुछ भी करने का आदेश नहीं दिया गया था। हमारे दरवाजे अभी भी बातचीत के लिए खुले हैं। सरकार ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोगों का अधिकार है। लेकिन बलूच याकजेहती कमेटी सिर्फ अपने अधिकारों को याद रखना चाहती है और प्रशासन के अधिकार को नजरअंदाज करती है। 
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