पाकिस्तान में आम चुनाव का माहौल बनते ही सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के बिखरने के संकेत मिलने लगे हैं। अब यह साफ हो गया है कि इस गठबंधन में शामिल दल आम चुनाव अलग-अलग लड़ेंगे। गठबंधन की दो प्रमुख पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बीच मौजूदा नेशनल असेंबली भंग करने के समय को लेकर भी मतभेद खड़ा हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक पीडीएम में शामिल दलों को अब यह भरोसा हो गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की राजनीतिक ताकत खत्म करने की योजना काफी हद तक सफल हो चुकी है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) बिखराव का शिकार हो गई है। ऐसे में अब उससे पीडीएम में शामिल दलों के लिए बड़ी चुनौती नहीं रह गई है। इस अहसास के कारण अब इन दलों में एक साथ रहने की मजबूरी खत्म हो गई है। कभी एक दूसरे की कट्टर विरोधी रही ये पार्टियां इमरान खान को सत्ता से हटाने के लिए ही एकजुट हुई थीं।
गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने मंगलवार को कहा कि इस वर्ष होने वाले आम चुनाव में पीडीएम में शामिल दलों ने अलग-अलग उतरने का फैसला किया है। वे नाम और अपने चुनाव निशान पर मुकाबले में उतरेंगे। पत्रकारों से बातचीत में सनाउल्लाह ने कहा कि पीएमएल-एन किसी भी अन्य राजनीतिक दल के साथ चुनावी गठबंधन नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि अगले आम चुनाव में पीएमएल-एन नेशनल असेंबली की कम से कम 100 सीटों पर विजयी रहेगा, जबकि प्रांतीय असेंबलियों में 200 सीटों पर उसकी जीत पक्की है।
इसके पहले नवगठित इश्तिहकाम-ए-पाकिस्तान (आईपीपी) पार्टी ने पीएमएल-एन के साथ चुनावी गठबंधन करने की इच्छा जताई थी। यह पार्टी पीटीआई से निकले नेताओं ने बनाई है। पिछले नौ मई को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद देश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। उसके बाद सेना ने पीटीआई नेताओं और समर्थकों पर दमन बढ़ा दिया। इस कारण बड़ी संख्या में नेताओं ने पीटीआई छोड़ दी।
पीपीपी के नेता आसिफ अली जरदारी पहले ही किसी अन्य दल के साथ चुनावी गठबंधन की संभावना से इनकार कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि पीपीपी अकेले और अपने चुनाव निशान तीर के साथ चुनाव लड़ेगी।
इस बीच नेशनल असेंबली को भंग करने की तारीख को लेकर पीपीपी और पीएमएल-एन में मतभेद खड़े हो गए हैं। मंगलवार को यह खबर आई कि इन दोनों पार्टियों में इस बात पर सहमति बन गई है कि अगले आठ अगस्त को सदन को भंग कर दिया जाएगा। लेकिन मीडिया में यह खबर आने के तुरंत बाद सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने एक ट्विट के जरिए इसका खंडन कर दिया। उन्होंने कहा कि नेशनल असेंबली को भंग करने के बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
सदन भंग करने के मामले में पाकिस्तान के मीडिया में पिछले कुछ दिनों के दौरान एक दूसरे को काटती खबरें दी गई हैं। पीपीपी नेता और वाणिज्य मंत्री नवीद कमर ने कहा था कि आठ अगस्त को सदन को भंग कर दिया जाना चाहिए, ताकि निर्वाचन आयोग को चुनाव की तैयारी का ज्यादा वक्त मिल सके। लेकिन पीएमएल-एन के नेता इससे सहमत नहीं हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि 14 अगस्त को सदन का कार्यकाल पूरा होने के पहले वे अपना पद छोड़ेंगे।