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अलग-थलग पड़ा पड़ोसी: क्या पाकिस्तान को कर्ज देते-देते थक गया चीन? शहबाज के भीख के कटोरे वाले बयान ने खोली पोल

Mon, 02 Jun 2025 08:30 AM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की सभी के सामने हाथ फैलाने वाली आदत अब और नहीं चल पाएगी। चीन समेत तमाम मित्र देश अब पाकिस्तान को पैसे देन में आनाकानी करने लगे हैं। इसका खुलासा खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में नवनियुक्त फील्ड मार्शल असीम मुनीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फील्ड मार्शल मुनीर के साथ वह अंतिम व्यक्ति होंगे, जो अपने कंधों पर यह बोझ उठाएंगे।
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पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ - फोटो : X @CMShehbaz
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विस्तार
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बलूचिस्तान के क्वेटा में सैन्य अधिकारियों की एक सभा को संबोधित करते हुए इस्लामाबाद और चीन, अजरबैजान, सऊदी अरब, यूएई, तुर्किये जैसे उसके सहयोगियों के बीच सुधरे संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे यह उम्मीद नहीं करते कि पाकिस्तान उनके पास भीख का कटोरा लेकर जाएगा। 

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लोन के सहारे चल रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान की अर्थव्यस्था लोन के सहारे ही चल रही है। पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आईएमएफ ने 1958 से पाकिस्तान को 25 बेलआउट पैकेज दिए हैं। हालिया लोन को देखें तो उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 2.1 बिलियन डॉलर मिले हैं। इसमें एक अरब डॉलर (लगभग 8,500 करोड़ रुपये) का नया लोन शामिल है, जो सितंबर 2024 में अप्रूव विस्तारित फंड सुविधा के तहत सहायता पैकेज का हिस्सा है। इसकी कुल राशि सात अरब डॉलर है। पाकिस्तान के लिए इस नई मदद का भारत ने कड़ा विरोध भी किया था। भारत ने साफ कहा था कि इस धन का दुरुपयोग राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।

हाथ फैलाने की मजबूरी के आगे शरीफ बेबस
हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अपने सहयोगियों के साथ देश के संबंधों के बारे में आशावादी नजर आए, लेकिन बार-बार पैसों के लिए हाथ फैलाने की मजबूरी के आगे वे बेबस भी दिखे। उन्होंने कहा, 'चीन पाकिस्तान का सबसे ज्यादा परखा हुआ मित्र है। सऊदी अरब पाकिस्तान के सबसे विश्वसनीय और भरोसेमंद दोस्तों में से एक है। अन्य देश तुर्किये, कतर और यूएई भी ऐसे ही हैं।'
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शरीफ का पूरा बयान
हालिया बयान में शरीफ ने कहा, 'मैं यह बात पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहता हूं। अब हमारे मित्र देश हमसे उम्मीद करते हैं कि हम उनके साथ व्यापार, वाणिज्य, नवाचार, अनुसंधान और विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य, निवेश और लाभदायक मुद्दों में पारस्परिक रूप से शामिल हों। अब वे हमसे यह उम्मीद नहीं करते कि हम उनके पास भीख का कटोरा लेकर जाएं।' उन्होंने आगे कहा, 'खुदा ने हमें प्राकृतिक और मानव संसाधनों से नवाजा है। हमें उनका पूरा उपयोग करना चाहिए और उन्हें इन बहुत लाभदायक उपक्रमों में लगाना चाहिए।' 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के सहयोगी चीन, तुर्किये और अजरबैजान ने सैन्य रूप से उसका समर्थन किया था। 

भारत की मिसाइल हमलों से हुए नुकसान को किया था कबूल
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कबूल किया था कि पाकिस्तानी एयरबेसों पर भारतीय हमलों ने उनकी सेना को बैकफुट पर ला दिया था। शरीफ ने अजरबैजान में एक भाषण के दौरान कहा, '9-10 मई की रात को हमने भारतीय आक्रमण का जवाब संयमित तरीके से देने का फैसला किया। हमारे सशस्त्र बल सुबह फज्र की नमाज के बाद 4.30 बजे कार्रवाई करने के लिए तैयार थे, लेकिन उससे पहले ही भारत ने एक बार फिर ब्रह्मोस का उपयोग करके मिसाइल हमला किया और रावलपिंडी के हवाई अड्डे सहित पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों को निशाना बनाया।'

पहले भी भारत से मिले करारे झटकों को कबूल कर चुके हैं शहबाज
यह पहली बार नहीं है जब शरीफ ने कबूल किया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पाकिस्तान में भारी नुकसान पहुंचाया है। पिछले महीने उन्होंने साफ शब्दों पर माना था कि भारतीय मिसाइलों ने 10 मई की सुबह नूर खान एयरबेस और पाकिस्तान के अंदर अन्य ठिकानों पर हमला किया। इस्लामाबाद में एक समारोह में बोलते हुए शरीफ ने सेना प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर के 2:30 बजे के फोन कॉल को याद किया था, जिसमें उन्हें भारत की ओर से किए गए मिसाइल हमलों की जानकारी दी गई थी।

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