पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के वकीलों ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें बरी करने की अपील की। राष्ट्रपति होते हुए उनके खिलाफ मुकदमा नहीं (Presidential Immunity) चलाया जा सकता, इस आधार पर जरदारी के लिए छूट मांगी गई। आमतौर पर भ्रष्टाचार के इस मामले को पार्क लेन के रूप में जाना जाता है। जरदारी पर पिछले कार्यकाल के दौरान प्रमुख कंपनियों को ऋण दिलाने के दौरान अधिकारियों को प्रभावित करने के आरोप हैं। इस्लामाबाद स्थित जवाबदेही अदालत (Accountability Court) के न्यायाधीश नासिर जावेद राणा की अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान उनके वकील ने कहा कि जरदारी राष्ट्रपति बन चुके हैं, ऐसे में उन्हें इस कानूनी कार्यवाही से संरक्षण मिलना चाहिए।
पार्क लेन मामले में जरदारी पर आरोप है कि उन्होंने 2008 से 2013 के कार्यकाल में प्रमुख कंपनियों को ऋण दिलाने के लिए संबंधित अधिकारियों को प्रभावित किया। उनके वकीलों ने अदालत में कहा, बतौर राष्ट्रपति उन्हें अदालती मामलों से छूट हासिल है। बता दें कि जरदारी 9 मार्च को दूसरी बार पाकिस्तान के राष्ट्रपति चुने गए।
68 वर्षीय जरदारी के अलावा उनकी बहन और उनके कई कथित व्यापारिक सहयोगियों के खिलाफ भी मामला दर्ज है। 2015 में फर्जी खातों और फर्जी लेनदेन से जुड़े मामले में अदालत ने पूछा, क्या सह-अभियुक्तों के खिलाफ मामला आगे बढ़ाया जा सकता है? पैरवी कर रहे वकीलों ने कहा कि शेष प्रतिवादियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है। दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुनवाई 17 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी।
जरदारी के खिलाफ दर्ज मामले में पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने दावा किया है कि जरदारी ने अपनी मुखौटा कंपनी पार्थेनॉन प्राइवेट लिमिटेड के लिए 1.5 अरब रुपये का ऋण जारी कराया था। बाद में लोन से हासिल पैसा फर्जी बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर कर निजी इस्तेमाल में लाया गया। एनएबी ने राष्ट्रपति जरदारी पर 2008-2013 के कार्यकाल में राष्ट्रीय खजाने को 3.77 अरब रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया।
यह है मामला
वर्ष 2020 में, राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने जरदारी, गिलानी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पूर्व प्रधानमंत्री गिलानी पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी मेहमानों द्वारा उपहार के रूप में भेंट की गई तीन लक्जरी गाड़ियों को जरदारी और नवाज शरीफ को अपने पास रखने की अनुमति देकर उन्हें अनुचित लाभ पहुंचाया। एनएबी ने दावा किया है कि गिलानी ने नेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए तोशाखाना में उपहार जमा करने से संबंधित प्रक्रियाओं में ढील दी और अपने व्यक्तिगत लाभ और हित के लिए अवैध तरीकों से मामूली भुगतान पर वाहनों को उनके पास रखने दिया। इसी अदालत ने रेंटल पावर प्रोजेक्ट्स (आरपीपी) भ्रष्टाचार मामलों में संदिग्धों को तलब किया।