पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी की ‘एक्टिविस्ट’ भूमिका से देश के सत्ताधारी हलकों में असहजता का आलम है। अल्वी शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट सरकार पर तीर चलाने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। अब उन्होंने पत्रकारों को परेशान करने की हालिया घटनाओं को लेकर सरकार पर गोला दागा है।
विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने ये पत्र जारी होते ही इस पर बयान दिया। पार्टी के नेता फव्वाद चौधरी ने इस बयान में ‘सही मकसद के पक्ष में खड़े होने और सबसे अहम मुद्दों की तरफ ध्यान खींचने’ के लिए राष्ट्रपति की तारीफ की। राष्ट्रपति बनने से पहले आरिफ अल्वी का संबंध पीटीआई से ही था। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के शासनकाल में राष्ट्रपति चुना गया था। अल्वी ने अपने बयानों से इसके पहले भी पीडीएम सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। इसके अलावा वे कुछ विधायी प्रक्रियाओं पर अपनी मुहर लगाने से इनकार कर चुके हैं।
पाकिस्तान में संसदीय प्रणाली की सरकार है। इसमें राष्ट्रपति की भूमिका संवैधानिक प्रमुख की होती है। उनसे अपेक्षा रहती है कि वे राजनीतिक विवादों से दूर रहें। इसीलिए अल्वी की बढ़ती सक्रियता से देश की संवैधानिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ने का अंदेश जताया जा रहा है। अल्वी ने अपने पत्र में इस तरफ ध्यान खींचा कि 2022 के विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 157वें नंबर पर आया। उन्होंने इस तरफ भी ध्यान खींचा है कि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पत्रकारों के बढ़ते उत्पीड़न और उनके खिलाफ होने वाली हिंसा को प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान के निम्न दर्जे का कारण बताया है।
पाकिस्तान में हाल ही में अजीज मेमन और नाज़िम जखियो नाम के दो पत्रकारों की हत्या कर दी गई। मुतिउल्लाह जान नाम के एक पत्रकार का दिन दहाड़े इस्लामाबाद से अपहरण कर लिया गया। उधर असद अली तूर और अबसार आलम नाम के पत्रकारों पर अनजान लोगों ने हमले किए, जिनमें वे दोनों घायल हो गए। राष्ट्रपति अल्वी ने अपने पत्र में इन घटनाओं का उल्लेख किया है। उन्होंने इसका भी जिक्र किया है कि हाल के महीनों में कई पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं।