भारत की सरकार पर आपत्तिजनक आरोप लगाए
अपने अनर्गल प्रलाप और प्रोपेगेंडा के जरिए मीडिया की सुर्खियां बटोरने की ताक में रहने वाले पाकिस्तानी नेता ने कहा, 'भारत ने पहलगाम त्रासदी के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया है।' यही नहीं, केंद्र सरकार के कड़े फैसलों से घबराए हुए बिलावल ने अपने गिरेबां में झांकने के बजाय भारत की सरकार पर आपत्तिजनक आरोप लगाए। उन्होंने कहा, पीएम मोदी ने अपनी कमजोरियों को छिपाने और देश की जनता को मूर्ख बनाने के लिए पाकिस्तान पर झूठे आरोप लगाए हैं।
'भारत ने स्वीकार किया है कि सिंधु पाकिस्तान की है'
बकौल बिलावल, 'भारत ने सिंधु जल संधि को एकतरफा तरीके से निलंबित किया है। भारत ने स्वीकार किया है कि सिंधु पाकिस्तान की है। मैं यहां सुक्कुर (Sukkur) में सिंधु के पास खड़ा होकर भारत को बताना चाहूंगा कि सिंधु हमारी है और सिंधु हमारी ही रहेगी, चाहे इस सिंधु में पानी बहे या उनका खून।'
बिलावल ने पीएम मोदी का सम्मानजनक तरीके से नाम नहीं लिया
उन्होंने कहा कि जब तक भारत यह फैसला वापस नहीं लेता पाकिस्तान का संघर्ष जारी रहेगा। सिंधु नदी के पश्चिमी किनारे पर बसे सुक्कुर शहर में एक जनसभा के दौरान बिलावल ने कहा कि वे देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस बात का भरोसा दिलाना चाहते हैं कि अलग राजनीतिक दल होने के कारण भले ही उनकी राय अलग हो लेकिन सिंधु जल संधि के मुद्दे पर वे उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। बिलावल ने अपनी मां और देश की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो का भी नाम लिया। उन्होंने कहा कि पीपीपी और सिंध प्रांत की जनता ने नदी पर डैम और नहर बनाने के मंसूबे कामयाब नहीं होने दिए हैं। आने वाले दिनों में भी सिंधु जल संधि में एकतरफा बदलाव की कोशिशों को विफल किया जाएगा। पाकिस्तानी हेकड़ी की एक मिसाल यह भी रही कि 37 साल के बिलावल अपने पूरे भाषण के दौरान 78 साल के पीएम मोदी का सम्मानजनक तरीके से नाम नहीं ले सके।
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पाकिस्तान की जनता डटकर मुकाबला करेगी
बिलावल ने कहा, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सिंधु जल संधि का एकतरफा निलंबन स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, वे जहां भी जाते हैं, हजारों साल पुरानी इसी सिंधु नदी सभ्यता का जिक्र करते हुए खुद को इसका वारिस बताते हैं। लेकिन हकीकत ये है कि पाकिस्तान में मोहन जोदड़ो इस बात का सुबूत है कि पाकिस्तान ही सिंधु का वारिस है, और हम इसकी सुरक्षा करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। आबादी के लिहाज से भले ही भारत में लोगों की संख्या पाकिस्तान से अधिक है, लेकिन पाकिस्तान की जनता डटकर मुकाबला करेगी। सीमा पर भी सैनिक मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। सिंधु पर डाका मंजूर नहीं है। पाकिस्तान की आवाम और भारत की जनता इस जुल्म को बर्दाश्त नहीं करेगी। पूरे पाकिस्तान को एकजुट होकर इस कठिन समय का मुकाबला करना होगा।
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पाक सीनेट ने भारत के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर उगला जहर
बड़बोले बिलावल के भड़काऊ बयान से पहले पाकिस्तान ने शुक्रवार को सीनेट में प्रस्ताव पारित कर भारत के खिलाफ जहर उगला। प्रस्ताव में कहा गया कि पहलगाम आतंकी हमले से पाकिस्तान का नाम जोड़ने का तुच्छ प्रयास किया जा रहा है और ऐसे आरोप एकदम निराधार हैं। सीनेट में यह प्रस्ताव उपप्रधानमंत्री इशाक डार की तरफ से पेश किया गया और सभी दलों ने समर्थन किया। प्रस्ताव में सिंधु जल संधि निलंबित करने को भारत की तरफ से युद्ध की कार्रवाई बताया गया। साथ ही कहा गया कि पाकिस्तान किसी भी सैन्य कार्रवाई से निपटने के लिए तैयार और सक्षम है।
74 महीने बाद आतंकी हमले से दहली घाटी
2019 की फरवरी में जम्मू-कश्मीर के ही पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद घाटी में सबसे घातक हमला पहलगाम में हुआ है। पहलगाम शहर से लगभग छह किलोमीटर दूर बैसरन चीड़ के पेड़ों के घने जंगलों और पहाड़ों से घिरा एक विशाल घास का मैदान है तथा देश व दुनिया के पर्यटकों के बीच पसंदीदा स्थान है।
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आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े TRF ने ली हमले की जिम्मेदारी
पहलगाम हमले के संबंध में अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हथियारबंद आतंकवादी 'मिनी स्विट्जरलैंड' में घुस आए और भोजनालयों के आसपास घूम रहे, खच्चर की सवारी कर रहे, पिकनिक मना रहे पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। पाकिस्तान में स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
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