Pakistan Politics: PM Shehbaz Sharif
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विकीपीडिया को पहले प्रतिबंधित करने और फिर प्रतिबंध हटाने के शहबाज शऱीफ सरकार के फैसले की देश में कड़ी आलोचना हो रही है। इसे पाकिस्तान में इंटरनेट के इस्तेमाल की राह में मौजूद रुकावटों की एक मिसाल बताया जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान के सत्ताधारियों की यह आदत बनी रही, तो देश नॉलेज इकॉनमी के इस दौर में कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा।
पिछले सप्ताहांत पाकिस्तान टेलीकॉम अथॉरिटी (पीटीए) ने विकीपीडिया को देश में प्रतिबंधित कर दिया। यह कदम इस आरोप में उठाया गया कि विकीपीडिया ने एक ऐसी सामग्री को अपनी साइट से नहीं हटाया, जिसे लोगों की धार्मिक भावना के खिलाफ बताया गया था। पीटीए के इस कदम पर नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया। उसके बाद सोमवार रात प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रतिबंध हटाने का आदेश दिया।
लेकिन इससे इंटरनेट अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता खुश नहीं हैं। डिजिटल राइट्स फाउंडेशन नाम के संगठन की कार्यकारी निदेशक निगहट डाड ने कहा है कि पीटीए ने पहले कई दमनकारी उपाय लागू कर रखे हैं। यह प्रतिबंध उसी सिलसिले की एक कड़ी था। उन्होंने कहा- ‘इस घटना से यह जाहिर हुआ है कि हमारी सरकार इंटरनेट और इसकी संभावनाओं को ठीक से समझती नहीं है। वह सोच कर चलती है कि इसे नियंत्रित किया जा सकता है।’
नेटवर्क इनोवेशन फॉर चेंज से जुड़े कार्यकर्ता अरजक खान ने आरोप लगाया है कि पिछले एक दशक में पाकिस्तान में मीडिया की आजादी में लगातार गिरावट आई है। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में उन्होंने कहा- यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेताओं ने डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता का गला घोंटने की लगातार कोशिश की है।
विकीपीडिया से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान में हर महीने उसे पांच करोड़ से ज्यादा पेज व्यू मिलते हैं (यानी लोग उसके इतने पेजों पर जाते हैं)। लेकिन यह पहली ऐसी लोकप्रिय साइट नहीं है, जिस पर रोक लगाने की कोशिश हुई हो। 2012 और 2016 में यूट्यूब पर भी प्रतिबंध लगाए गए थे। पिछले वर्ष भी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के भाषणों को लाइव दिखाने वाले यूट्यूब चैनलों का प्रसारण रोक दिया गया था। पाकिस्तान की साइबर सिक्योरिटी कंपनी सर्फशार्क के मुताबिक 2015 के बाद से इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने की कम से कम 12 कोशिशें हुई हैं।
विकीपीडिया पर प्रतिबंध लगाने का विरोध जिन संगठनों ने किया, उनमें नेशनल कमीशन फॉर ह्यूमन राइट्स भी है। इस संगठन ने एक बयान में कहा कि विकीपीडिया पाकिस्तान में डिजिटल सूचना का एक प्रमुख स्रोत है। उस पर प्रतिबंध से नागरिकों के सूचना हासिल करने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। थिंक टैंक इकेरस के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर अहसान हमीद दुर्रानी ने भी कहा है कि विकीपीडिया विश्वसनीय सूचना का एक प्रमुख स्रोत है।
कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि विकीपीडिया जैसी साइटों को रोकने की कोशिश का संबंध सिर्फ अभिव्यक्ति की आजादी से नहीं है। बल्कि इसका संबंध अर्थव्यवस्था से भी है। निगहट डाड ने कहा कि छात्र, अनुसंधानकर्ता और आम लोग दुनिया को समझने के लिए ऐसी साइटों पर जाते हैं। इन पर रोक लगाना आर्थिक रूप से भारी नुकसान का सौदा साबित होगा।