यहां कम्युनिस्ट प्रभाव वाली सरकार बनने के बावजूद अमेरिका ने नेपाल को अपने पाले में लाने की कोशिशों में कोई ढील नहीं दी है। उसके अधिकारियों का नेपाल दौरा पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के मुताबिक जारी है। यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूसएड) की प्रशासक समांत पॉवर मंगलवार को यहां पहुंचीं। इस बीच यह जानकारी सामने आई है कि सिर्फ एक हफ्ते बाद अमेरिका की उप सहायक विदेश मंत्री आफरीन अख्तर यहां आएंगी। वे 14 फरवरी से दो दिन की नेपाल यात्रा पर रहेंगी। वे अमेरिकी विदेश मंत्रालय में नेपाल सहित कई दक्षिण एशियाई देशों से संबंधित मामलों की प्रभारी हैं।
कुछ दिन पहले ही अमेरिका की राजनीतिक मामलों की उप मंत्री विक्टोरिया नुलैंड ने काठमांडू की यात्रा की। उन्होंने यहां विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बातचीत की थी। उस दौरान उन्होंने नेपाल के नेताओं को आगाह किया कि पड़ोसी देशों से संबंध बनाते समय उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। खास कर ऐसा आर्थिक मामलों में करना चाहिए। पर्यवेक्षकों के मुताबित नुलैंड का इशारा चीन की तरफ था। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के समर्थन से पुष्प कमल दहल की सरकार बनने के बाद से ये धारणा बनी है कि नेपाल में चीन का प्रभाव बढ़ेगा। दहल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता हैं।
समांता पॉवर का दर्जा नुलैंड और अख्तर से ऊपर है। जो बाइडन प्रशासन में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा है। साथ ही वे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की सदस्य भी हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अखबार काठमांडू पोस्ट को बताया- ‘नुलैंड ने नेपाल के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को लेकर बातचीत की। पॉवर आर्थिक सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में सहभागिता के मसले पर बातचीत करेंगी। अख्तर क्षेत्रीय मुद्दों और विभिन्न मसलों में अमेरिका की भागीदारी के सवाल पर बातचीत करने के लिए आ रही हैं।’
समांत पॉवर की यात्रा से पहले जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि अपनी यात्रा के दौरान पॉवर नेपाल सरकार और यहां के लोगों के साथ अमेरिका के 75 साल की सहभागिता पर रोशनी डालेंगी। वे नेपाल और इसकी नई सरकार के साथ अमेरिका के संबंध बढ़ाने के संकल्प को व्यक्त करेंगी। साथ ही वे संघीय व्यवस्था, सिविल सोसायटी और मीडिया की आजादी के क्षेत्र में हासिल हुई उपलब्धियों को और आगे बढ़ाने के प्रयासों से संबंधित घोषणाएं करेंगी।
अमेरिकी पत्रिका फॉरेन पॉलिसी में छपे एक विश्लेषण में अमेरिकी रणनीति में नेपाल के बढ़ते महत्त्व की चर्चा की गई है। इसमें कहा गया है कि चीन के साथ बढ़ती होड़ के कारण अमेरिका ने अपनी रणनीति में नेपाल को खास लक्ष्य बना लिया है। जानकारों के मुताबिक फॉरेन पॉलिसी पत्रिका में छपे विचार आम तौर पर अमेरिका सरकार की रणनीतिक सोच के अनुरूप होते हैं। पत्रिका के विश्लेषण में कहा गया है- ‘अमेरिका ने लंबे समय से नेपाल के साथ अपने पार्टनरशिप को अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा है। इस रणनीति का मकसद चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना है।’