क्या पाकिस्तान सरकार और ऐस्टैबलिशमेंट पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के राजनीतिक अभियान पर लगाम लगाने में कामयाब हो गए हैं? अपने लॉन्ग मार्च को इस्लामाबाद पहुंचने से पहले ही खत्म कर देने के इमरान खान के फैसले के बाद यह प्रश्न उठा है। समझा जाता है कि लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर के नए सेनाध्यक्ष पद पर नियुक्ति से इमरान खान के लिए प्रतिकूल स्थितियां बन गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी को समझते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष खान ने लॉन्ग मार्च को रावलपिंडी से आगे ना जाने का फैसला किया।
अब पाकिस्तान सरकार ने दो टूक कह दिया है कि जल्द चुनाव कराने की पीटीआई की मांग किसी रूप में नहीं मानी जाएगी। योजना विकास मंत्री अहसान इकबाल ने रविवार को कहा- ‘जहां तक चुनावों का सवाल है, तो यह पीटीआई भी जानती है कि समय से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। अभी सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास में छह से आठ महीने लगेंगे। इसलिए आम चुनाव अगले साल अगस्त के पहले नहीं हो सकते।’
इकबाल ने कहा कि अगले साल मार्च या अप्रैल में नई जनगणना के नतीजे जारी होंगे। सिंध की प्रांतीय सरकार ने साफ कहा है कि नए चुनाव नई जनगणना के आधार पर ही होने चाहिए। इसलिए अगर मार्च या अप्रैल में जनगणना के नतीजे सामने आते हैं, तो निर्वाचन आयोग को चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन में चार से पांच महीने लगेंगे। इकबाल ने संकेत दिया कि चुनाव नेशनल असेंबली का कार्यकाल पूरा होने से ठीक पहले अगले साल अक्टूबर में कराए जाएंगे।
पर्यवेक्षकों ने इस बात पर गौर किया है कि सरकार ने पीटीआई की मांग राजनीतिक रुख के तौर पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक कारणों से ठुकराई है। इसे इमरान खान को अपना चेहरा बचाने के दिए गए अवसर के रूप में देखा जा रहा है। ऐसी भी अटकलें लगी हैं कि शहबाज शरीफ सरकार ने अंदरूनी तौर पर पीटीआई से संवाद कायम किया है। लॉन्ग मार्च टालने का फैसला इसी का नतीजा था।
इमरान खान के इस फैसले से उनके समर्थकों को मायूसी हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर खुल कर इसका इजहार किया है। सोशल मीडिया टिप्पणियों में कहा गया है कि इमरान खान ने थकान का परिचय दिया है। इसका उनकी लोकप्रियता पर पड़ेगा। इमरान खान ने बीते शनिवार को लॉन्ग मार्च खत्म करने की घोषणा करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी के सदस्य अब प्रांतीय असेंबलियों से इस्तीफा दे देंगे।
लॉन्ग मार्च की शुरुआत पिछले 28 अक्टूबर को लाहौर से हुई थी। तीन नवंबर को वजीराबाद में इमरान खान पर हुए हमले के बाद इसे रोक दिया गया था। उस हमले में खान गोली लगने से घायल हो गए थे। बाद में लॉन्ग मार्च पीटीआई के उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी के नेतृत्व में दोबारा शुरू किया गया। पीटीआई ने एलान किया था कि ये मार्च राजधानी इस्लामाबाद तक जाएगा और उसके बाद इसके आगे का कार्यक्रम घोषित किया गया जाएगा।
शनिवार को लॉन्ग मार्च खत्म करने की घोषणा के बाद इमरान खान ने एक ट्विट में कहा- ‘जब तक देश में कानून का राज और असली आजादी कायम नहीं हो जाती, हमारी तहरीक जारी रहेगी।’ लेकिन इसे महज एक सियासी बयान के रूप में देखा गया है। सियासी हलकों में ऐसी अटकलों का जोर है कि इमरान खान ने नए बने हालात से समझौता कर लिया है।