पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक अब नए सिरे से ‘पाकिस्तान की आजादी’ की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। भंग नेशनल असेंबली को बहाल करने और रद्द अविश्वास प्रस्ताव पर शनिवार को मतदान कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इमरान समर्थक ‘बागी’ तेवर में नजर आ रहे हैं। कोर्ट के फैसले को सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। ये फैसला आने के तुरंत बाद सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने कहा कि सरकार बदलने के बाद ‘लड़ाई 23 मार्च 1940 के मुकाम’ से शुरू होगी।
ऐसी बात कहने वाले फव्वाद चौधरी अकेले नेता नहीं हैं। बल्कि संकेत यह है कि पार्टी ने अगली सरकार को विदेशी साजिश से बनी सरकार के रूप में पेश करने की ठोस रणनीति तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री के राजनीतिक संचार संबंधी विशेष सलाहकार शाहबाज गिल ने कहा- ‘हमारे पूर्वजों ने अपना सब कुछ कुर्बान करते हुए एक स्वतंत्र देश की स्थापना करने के लिए 1947 में वाघा बॉर्डर पार किया था। लेकिन शायद उन्हें नहीं मालूम था कि हम ब्रिटेन की जगह अमेरिका का गुलाम बन जाएंगे। अब ये मुमकिन है कि पाकिस्तान उस हाल में पहुंच जाए, जहां यह 1947 में था।’
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान इमरान खान ने आरोप लगाया था कि अमेरिका उनकी सरकार की स्वतंत्र विदेश नीति से खफा है। इसलिए उसके इशारे पर उनकी सरकार गिराने की साजिश रची गई है। पीटीआई का आकलन है कि इमरान खान ने जो आरोप लगाए, उस पर जनता के एक बड़े हिस्से में यकीन किया गया है। इससे अगले आम चुनाव- चाहे ये जब कभी हों- पीटीआई को फायदा होगा। सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री फारूक हबीब ने कहा है कि इमरान खान के डर से सभी चोर इकट्ठे हो गए हैं। इमरान खान की इस बात पर लोगों ने यकीन किया है। उन्होंने कहा- ‘जब चुनाव होंगे, तब जनता विपक्ष को बताएगी कि विदेशी षड्यंत्र का समर्थन करने वालों के साथ कैसा व्यवहार होता है।’ आर्थिक मामलों के मंत्री कमर अयूब ने भी कहा कि जब भी चुनाव हों, विपक्षी नेताओं को पाकिस्तान की जनता सबक सिखाएगी।