पाकिस्तान के निवर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी पब्लिकेशन की समाचार रिपोर्ट को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर सही है तो यह बड़े पैमाने का अपराध है। उन्होंने आगे कहा कि भगवान न करे कि यह सरकार अमेरिकी साजिश से आई होती, तो यह हमारे लिए शर्म का क्षण होता। इस रिपोर्ट में पिछले साल इमरान खान की सरकार को गिराने की अमेरिकी साजिश के सबूत होने का दावा किया गया था।
शहबाज ने दी प्रतिक्रिया
शहबाज शरीफ अमेरिका स्थित एक ऑनलाइन समाचार संगठन द इंटरसेप्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट का जिक्र कर रहे थे। इसी मामले को लेकर एक इंटरव्यू में शरीफ ने कहा कि भगवान न करे कि यह सरकार अमेरिकी साजिश से आई होती, तो यह हमारे लिए शर्म का क्षण होता। उन्होंने आगे कहा कि अगर गोपनीय पाकिस्तानी सरकार के दस्तावेज अंतरराष्ट्रीय अखबार में प्रकाशित हुए हैं और सच है, तो यह एक बड़ा अपराध है।
निवर्तमान प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि उनके नेतृत्व में कथित सिफर (गुप्त राजनयिक दस्तावेज) मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की दो बैठकें हुईं। एक बैठक में पूर्व राजदूत और विदेश सचिव असद मजीद ने साफ कहा कि वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक लू के साथ उनकी मुलाकात में किसी साजिश की कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और अन्य सेवा प्रमुखों ने भी पुष्टि की है कि पाकिस्तान के खिलाफ कोई साजिश नहीं थी, मजीद ने भी कहा था कि साजिश का कोई सवाल ही नहीं था।
शरीफ ने आगे इमरान के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि खान ने कहा था कि उनकी सरकार को गिराने की साजिश रूस के साथ उनके बढ़ते संबंधों के कारण रची गई थी। शरीफ ने दोहराया कि इमरान खान के आरोप सिर से पैर तक झूठ का पुलिंदा थे। इनमें कोई वास्तविकता नहीं थी।
सजा काट रहे हैं इमरान
70 वर्षीय इमरान खान वर्तमान में भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद तीन साल की जेल काट रहे हैं। कथित सिफर (गुप्त राजनयिक दस्तावेज) में अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों के बीच एक बैठक का विवरण था, जिसमें दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो के सहायक सचिव डोनाल्ड लू और पाकिस्तानी दूत असद मजीद खान शामिल थे।
द इंटरसेप्ट ने कल जारी की थी रिपोर्ट
द इंटरसेप्ट ने बुधवार को "गोपनीय पाकिस्तानी सरकार के दस्तावेज" का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी, अमेरिकी विदेश विभाग ने सात मार्च, 2022 की बैठक में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को लेकर अपनी तटस्थता के लिए इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए पाकिस्तानी सरकार को प्रोत्साहित किया था। साथ ही, प्रकाशन ने यह भी दावा किया कि उसने दस्तावेज को प्रमाणित करने के लिए व्यापक प्रयास किए, लेकिन पाकिस्तान में सुरक्षा माहौल को देखते हुए पाकिस्तानी सरकार के स्रोतों से स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं थी।
इमरान खान ने लगाए थे ये आरोप
खान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष भी हैं। उन्हें अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव हारने के बाद नेशनल असेंबली से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया था कि मॉस्को का दौरा करने और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद वाशिंगटन इसमें शामिल हो गया।
खान ने आरोप लगाया था कि अमेरिका ने उन्हें पद से हटाने की योजना बनाई और अपने दावों का समर्थन करने के लिए एक सार्वजनिक रैली में गुप्त राजनयिक दस्तावेज को लहराया। अमेरिका ने बार-बार ऐसे आरोपों का खंडन किया है और उन्हें पूरी तरह से झूठा बताया। खान ने पिछले साल फरवरी में मास्को की यात्रा की थी और यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के दिन राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की थी।
अमेरिकी विदेश विभाग का बयान आया सामने
इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह दस्तावेज की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकता। बुधवार को वाशिंगटन में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, मैं इस बारे में नहीं कह सकता कि यह वास्तविक पाकिस्तानी दस्तावेज है या नहीं; इसके बारे में मुझे नहीं पता है।