पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनावी सुधारों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की शुरुआत करेगी।
उन्होंने नेशनल असेंबली (संसद) में विश्वासमत जीतने के बाद कहा कि उनकी सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग शुरू करने की योजना बनाई है ताकि लाखों पाकिस्तानी नागरिक चुनावों में विदेशों में मतदान कर सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए चुनाव में आधुनिक तकनीक ला रहे हैं। हमने भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का उपयोग करने का निर्णय लिया है। चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले मतदान में गड़बड़ी के दावों से निपटने के लिए इसका उपयोग करना महत्वपूर्ण है। हम एक ऐसी व्यवस्था लाने पर भी काम कर रहे हैं जिसके तहत विदेशों में रह रहे पाकिस्तानी अपना वोट डाल सकें।’
खान ने कहा, ‘ठीक उसी तरह जैसे अमेरिका में जहां पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार चुनावी धांधलियों के आरोपों को पारदर्शी प्रणाली द्वारा खारिज कर दिया गया था, पाकिस्तान भी देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उसी प्रणाली को लागू करेगा।’
उन्होंने कहा, ‘क्रिकेट में कप्तान के रूप में, मैं तटस्थ अंपायरिंग की अवधारणा लाया, इसी तरह मेरी सरकार एक निष्पक्ष चुनावी प्रणाली का गठन करेगी।’ पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने शुक्रवार को कहा था कि सीनेट के चुनाव संविधान के मुताबिक हुए हैं और वह (आयोग) किसी तरह के दबाव में कभी नहीं आया है और अल्लाह ने चाहा तो भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा।’
प्रधानमंत्री खान द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ आरोप लगाए जाने पर आयोग ने हैरानी जताई थी और निराशा प्रकट करते हुए यह बात कही थी। खान ने आयोग पर बुधवार को पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन सीनेट के लिए हुए चुनाव में भ्रष्टाचार को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था, ‘आपने (ईसीपी) लोकतंत्र का मजाक बना दिया, आपने वोट की खरीद फरोख्त रोकने के लिए कुछ नहीं कर राष्ट्र की नैतिकता को नुकसान पहुंचाया।’ विपक्षी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट उम्मीदवार एवं पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी द्वारा सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के उम्मीदवार अब्दुल हफीज शेख को शिकस्त देने के बाद खान ने आयोग की आलोचना की थी।
वहीं आयोग ने खान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था, ‘आयोग कभी भी किसी तरह के दबाव के आगे नहीं झुका और अल्लाह ने चाहा, तो भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा।’