चीन द्वारा उइगुर मुस्लिमों के खिलाफ किए जा रहे कार्यों को लेकर सारी दुनिया में जहां उसकी आलोचना की जा रही है। वहीं, इस मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने चुप्पी साधी हुई है। एक साक्षात्कार में जब उनसे इस विषय पर पूछा गया तो उन्होंने इस पर जवाब देने के बजाय कहा कि चीन हमारा बेहद अच्छा दोस्त हैं जिसने हर मुश्किल घड़ी में हमारी मदद की है।
जर्मनी के डीडब्लू न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में इमरान खान ने कश्मीर के मुद्दे पर लंबी बात की, लेकिन जब उइगुर मुस्लिमों की बात आई तो उन्होंने कहा कि चीनी काफी संवेदनशील हैं और इसीलिए इस्लामाबाद उनके साथ उइगुर मुद्दे पर चर्चा करने से बचता है।
जब उनसे पूछा गया कि वह कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत की आलोचना करते हैं, लेकिन वह उइगुर मुद्दे पर इतने मुखर क्यों नहीं है? इस पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके पीछे दो कारण हैं, पहला जो भारत में हो रहा है उसका पैमाना चीन में उइगुरों के साथ होने वाले बर्ताव की तुलना के बराबर नहीं है। दूसरा चीन हमारा अच्छा दोस्त हैं।
उन्होंने कहा कि चीन ने हमारी सरकार को विरासत में मिले आर्थिक संकट के कारण उत्पन्न हुए हमारे सबसे कठिन दौर के दौरान मदद की है। इसलिए, हम निजी तौर पर चीन के साथ संवेदनशील मुद्दों पर बात करते हैं ना कि सार्वजनिक रूप।
चीन की अपने देश में रहने वाले अल्पसंख्यकों पर नकेल कसने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की गई है। चीन पर उइगुरों को बड़े पैमाने पर नजरबंदी शिविरों में भेजने, उनकी धार्मिक गतिविधियों में दखल देने और समुदाय को जबरदस्ती फिर से शिक्षा या स्वदेशीकरण से गुजरने के लिए भेजने का आरोप है। हालांकि, पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधी हुई है।
जब भारत ने पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया था, तो पाकिस्तान ने नई दिल्ली के खिलाफ बयानबाजी की थी और क्षेत्र में मुसलमानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी। खान ने खुद को कश्मीरी लोगों का राजदूत भी बताया था।
हालांकि, जब चीन द्वारा मुस्लिमों के साथ व्यवहार करने की बात आती है, तो पाकिस्तान मूक हो जाता है और जब उस पर टिप्पणी करने के लिए कहा गया, तो पाकिस्तान के पीएम ने यह कहते हुए इसे अलग करने की कोशिश की कि उसके अपने देश में बहुत कुछ चल रहा है।