बिलावल के नरम पड़े तेवर
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान आतंकवाद का शिकार है और वह आतंकवाद को निर्यात नहीं करता। उन्होंने कहा, "यदि भारत शांति के मार्ग पर चलना चाहता है, तो वह खुले हाथों से आए, मुट्ठी बांधकर नहीं। वह तथ्यों के साथ आए, झूठ के साथ नहीं। आइए, हम पड़ोसी की तरह बैठें और सच्चाई की बात करें।
उन्होंने आगे कहा, "अगर वे ऐसा नहीं करते... तो याद रखें कि पाकिस्तान की जनता घुटने टेकने के लिए नहीं बनी है। हम संघर्ष इसलिए नहीं करते क्योंकि हमें उससे प्रेम है, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि हमें स्वतंत्रता से प्रेम है।
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यूएन में पाकिस्तान की पिटी भद्द
भारत सरकार ने इसके साथ ही कई राजनयिक कदम भी उठाए थे। जिसमें अटारी के एकीकृत चेक पोस्ट को बंद करना, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना को निलंबित करना और उन्हें 40 घंटे में देश छोड़ने का आदेश देना, साथ ही दोनों देशों के उच्चायोगों में अधिकारियों की संख्या को कम करना शामिल था।
इस बीच, पाकिस्तान को एक और झटका तब लगा जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बंद-कमरे की बैठक में उसे खिलाफ तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। यह बैठक पाकिस्तान के अनुरोध पर बुलाई गई थी, जो इस समय सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए 'फॉल्स फ्लैग' (झूठे झंडे) के दावे को स्वीकार नहीं किया और लश्कर-ए-तैयबा जैसी प्रतिबंधित आतंकवादी संस्था की भूमिका पर सवाल उठाए। बैठक में पहलगाम हमले की व्यापक निंदा की गई। कुछ सदस्यों ने विशेष रूप से धार्मिक पहचान के आधार पर पर्यटकों को निशाना बनाने का मुद्दा भी उठाया।
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