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Pakistan: खून बहाने की धमकी देने वाले बिलावल भुट्टो के होश आए ठिकाने, भारत का रुख देख अब कर रहे शांति की अपील

Tue, 06 May 2025 06:16 PM IST
राहुल कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को रद्द किए जाने के बाद पाकिस्तान के पूर्व मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने खून बहाने के धमकी दी थी। भारत की ओर से घटना को लेकर अपनाए जा रहे कड़े रुख को देखते हुए बिलावल ने अपने बयान से पलटी मार ली है।
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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी - फोटो : ANI
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विस्तार
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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने सिंधु जल संधि को रद्द किए जाने पर खून बहाने की धमकी दी थी। भारत का कड़ा रुख देखने के बाद अब उनके होश ठिकाने आ गए हैं। बिलावल ने अब भारत के साथ शांति की बात कही है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संघर्ष के लिए नहीं बल्कि स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है।

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बिलावल के नरम पड़े तेवर
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान आतंकवाद का शिकार है और वह आतंकवाद को निर्यात नहीं करता। उन्होंने कहा, "यदि भारत शांति के मार्ग पर चलना चाहता है, तो वह खुले हाथों से आए, मुट्ठी बांधकर नहीं। वह तथ्यों के साथ आए, झूठ के साथ नहीं। आइए, हम पड़ोसी की तरह बैठें और सच्चाई की बात करें। 

उन्होंने आगे कहा, "अगर वे ऐसा नहीं करते... तो याद रखें कि पाकिस्तान की जनता घुटने टेकने के लिए नहीं बनी है। हम संघर्ष इसलिए नहीं करते क्योंकि हमें उससे प्रेम है, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि हमें स्वतंत्रता से प्रेम है।  

ये भी पढ़ें: पहलगाम हमला: 'भारत की कूटनीति के सामने पाकिस्तान ने फिर मुंह की खाई', UNSC की बंद कमरे में बैठक पर अकबरुद्दीन

सिंधु जल संधि रद्द होने के बाद उगला था जहर
इससे पहले 25 अप्रैल को एक जनसभा को संबोधित करते हुए बिलावल ने कहा था कि  सिंधु नदी पाकिस्तान की है। भारत ने 1960 की संधि के दौरान इस बात को स्वीकर किया था कि इस नदी का पानी पाकिस्तान का है। अब मोदी ने अगर सिंधु का पानी रोका तो फिर यह युद्ध की तरफ इशारा होगा। पाकिस्तान छोटा देश ही सही लेकिन यहां का आम नागरिक अपने हक के लिए लड़ना जानता है इसलिए या तो सिंधु में पानी बहेगा या फिर भारतीयों का खून।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इस हमले में 25 भारतीय नागरिकों और एक नेपाली नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इसके जवाब में भुट्टो-ज़रदारी ने एक जनसभा में भावनात्मक और भड़काऊ भाषण दिया था।

 
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यूएन में पाकिस्तान की पिटी भद्द
भारत सरकार ने इसके साथ ही कई राजनयिक कदम भी उठाए थे। जिसमें अटारी के एकीकृत चेक पोस्ट को बंद करना, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना को निलंबित करना और उन्हें 40 घंटे में देश छोड़ने का आदेश देना, साथ ही दोनों देशों के उच्चायोगों में अधिकारियों की संख्या को कम करना शामिल था।

इस बीच, पाकिस्तान को एक और झटका तब लगा जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बंद-कमरे की बैठक में उसे खिलाफ तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। यह बैठक पाकिस्तान के अनुरोध पर बुलाई गई थी, जो इस समय सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए 'फॉल्स फ्लैग' (झूठे झंडे) के दावे को स्वीकार नहीं किया और लश्कर-ए-तैयबा जैसी प्रतिबंधित आतंकवादी संस्था की भूमिका पर सवाल उठाए। बैठक में पहलगाम हमले की व्यापक निंदा की गई। कुछ सदस्यों ने विशेष रूप से धार्मिक पहचान के आधार पर पर्यटकों को निशाना बनाने का मुद्दा भी उठाया।

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