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पाकिस्तान: अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले ही पीएम आवास छोड़कर चले गए इमरान खान, उनके सांसद ने बताई आगे की रणनीति

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 10 Apr 2022 02:33 AM IST

सार

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सांसद फैसल जावेद खान ने ट्वीट कर कहा, "मैंने प्रधानमंत्री इमरान खान को पीएम आवास से विदाई दी। वे गर्व से बाहर गए और झुके नहीं। उन्होंने पूरे देश को उठाया। 
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अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले ही आधिकारिक आवास छोड़कर गए इमरान खान। - फोटो : Social Media


पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सांसद फैसल जावेद खान ने ट्वीट कर कहा, "मैंने प्रधानमंत्री इमरान खान को पीएम आवास से विदाई दी। वे गर्व से बाहर गए और झुके नहीं। उन्होंने पूरे देश को उठाया। मुझे एक पाकिस्तानी के तौर पर गर्व है कि हमें इमरान जैसा नेता मिला। पाकिस्तान खान- इमरान खान।"


कहां गए इमरान खान?

बताया गया है कि इमरान खान फिलहाल बिन गाला स्थित अपने आवास के लिए रवाना हो गए हैं। वे इससे पहले भी पीटीआई की कई बैठकों को अपने निजी आवास पर ही आयोजित कर चुके हैं। फिलहाल उनके साथ उनकी पत्नी बुशरा के भी जाने की बात सामने आई है। 




आगे क्या है इमरान की पार्टी की योजना?

इस बीच संसद में अविश्वास प्रस्ताव के पास होने के बाद पीटीआई सांसद अली मोहम्मद खान ने कहा, "मुझे इस बात की खुशी है कि जिस आदमी के साथ में खड़ा हूं इमरान खान, उसने हुकूमत कुर्बान की है, लेकिन गुलामी नहीं कबूल की। शहादत कबूल की। आज का दिन जहां बहुत से चेहरों को खुशी दे कर जा रहा है, वहीं कई लोगों को गुस्सा छोड़कर जा रहा है।" 


उन्होंने कहा, "मैंने विपक्ष की हंसी और नारे बर्दाश्त किए हैं। आपके दिल में तमन्ना थी कि इमरान खान कि सियासत खत्म हो। इमरान खान एक बार फिर इस कुर्सी पर आएगा। दो तिहाई बहुमत से जीत कर आएगा। आवाम की ताकत से आएगा। थोड़ा इंतजार करें। आज भी पाकिस्तान में कुछ लोग हैं, जो कि साम्राज्य के सामने खड़े हैं, वे इसी तरह लड़ते रहेंगे। इमरान खान जिंदाबाद।"


पीटीआई नेता ने फिर लिया अमेरिका का नाम

अली खान ने आगे कहा, "एक सवाल तारीख उनके लिए भी छोड़ रही है कि जिस शख्स (इमरान खान) को विपक्षी नेता यहूदी और अमेरिकी कहते थे, आखिर वो कैसा नेता था, जिसे हटाने के लिए अमेरिका ने पूरा जोर लगा दिया। उनके (अमेरिका)  लिए रूस सिर्फ बहाना था, इमरान खान असली निशाना था।" एक वो वक्त था, जब पाकिस्तान में अमेरिकी सैनिक आए और एक ये वक्त है कि जब वे अमेरिका में बैठकर ही साजिश बनाते रहे कि अगर इमरान की हुकूमत न गिरी तो पाकिस्तान के लिए चीजें कठिन हो जाएंगी।
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