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Pakistan: जारी करना पड़ेगा नया पासपोर्ट? पाकिस्तान के अब्राहम समझौते को नहीं मानने की ये भी है बड़ी वजह

Wed, 27 May 2026 11:07 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिका ने पाकिस्तान समेत कई अरब देशों को अब्राहम समझौते को स्वीकार करने का कहकर एक नई बहस छेड़ दी है। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान के लिए खासी परेशानी खड़ी हो सकती है। हालांकि फिलहाल पाकिस्तान ने अब्राहम समझौते को मानने से इनकार कर दिया है, लेकिन पाकिस्तान अमेरिका को नाराज करने का जोखिम भी नहीं ले सकता। 
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पाकिस्तान का अब्राहम समझौते को मानने से इनकार - फोटो : एक्स
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विस्तार
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर अब्राहम समझौते में शामिल होने का दबाव बनाया है। हालांकि पाकिस्तान ने इससे साफ इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने कहा है कि इस्राइल को लेकर उनकी दीर्घकालिक नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही पाकिस्तान ने कहा है कि वह ऐसी मांगों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। दरअसल पाकिस्तान अगर अब्राहम समझौते को मानता है तो उसे न सिर्फ घरेलू स्तर पर लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा बल्कि अपने पासपोर्ट में भी बदलाव करना पड़ेगा। आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों है?
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पाकिस्तान को क्यों बदलना पड़ेगा अपना पासपोर्ट?
अगर पाकिस्तान अब्राहम समझौते में शामिल होने का फैसला करता है तो उसे तुरंत अपना पासपोर्ट बदलना पडे़गा। पाकिस्तान को पासपोर्ट पर अभी इस्राइल की यात्रा करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। पाकिस्तानी पासपोर्ट में साफ लिखा है 'यह पासपोर्ट इस्राइल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों में यात्रा के लिए मान्य है।' अगर पाकिस्तान अमेरिका दबाव में अब्राहम समझौते को स्वीकार करता है तो उसे अपने पासपोर्ट में बदलाव करने की जरूरत होगी और इस्राइल की यात्रा पर लगे प्रतिबंध वाले खंड को हटाना होगा। पासपोर्ट में यह बदलाव सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है बल्कि इसमें वीजा, आव्रजन नियम, कांसुलर पहुंच जैसी चीजों में भी बदलाव करना पड़ेगा। यह पाकिस्तान की विदेश नीति में बड़ा बदलाव होगा। 

क्या है अब्राहम समझौता?
यह 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से शुरू किया गया एक समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य इस्राइल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य करना है। पहले अरब देशों की यह शर्त हुआ करती थी कि जब तक फलस्तीन के मुद्दे का समाधान नहीं होता, वे इस्राइल को मान्यता नहीं देंगे। लेकिन इस समझौते ने पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग को सबसे ऊपर रखा। फिलहाल इस समझौते में छह देश शामिल हैं। इसकी शुरुआत 2020 में इस्राइल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन के बीच हस्ताक्षर के साथ हुई थी। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसका हिस्सा बने, और 2025 में कजाखस्तान ने भी औपचारिक रूप से इस समूह को ज्वाइन कर लिया।
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अब चर्चा में क्यों है अब्राहम समझौता?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि अब अमेरिका चाहता है कि मुस्लिम बहुल देश इस्राइल से अपने संबंधों को सामान्य करें। ट्रंप ने कहा कि उनका प्लान है कि जैसे ही ईरान के साथ कोई डील फाइनल हो, उसके तुरंत बाद सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन जैसे देश भी अब्राहम एकॉर्ड्स का हिस्सा बन जाएं। ट्रंप का दावा है कि इस समझौते से इसमें शामिल देशों में भारी आर्थिक और सामाजिक प्रगति हुई है।
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