भारत ने मंगलवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1945 की व्यवस्था में काम कर रही है। यह विश्वसनीयता के संकट का सामना कर रही है। भारत ने आगे कहा कि 'निहित स्वार्थ' उन सुधारों को रोक रहे हैं, जिनकी आवश्यकता इसे समकालीन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाने के लिए है।
स्थायी श्रेणी मेंं विस्तार करना चाहिए
सुधार का अर्थ क्या?
उन्होंने कहा, टवैश्विक संस्थानों को आज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए, न कि 1945 की वास्तविकताओं को। इस परिषद में यह बात सबसे अधिक जरूरी है।' अफ्रीका के साथ हुए अन्याय का खास रूप से जिक्र करते हुए (जिसे स्थायी सदस्यता से बाहर रखा गया है), गुटेरेस ने कहा, 'सुधार का अर्थ है विश्वसनीयता बहाल करना और यह सुनिश्चित करना कि यह परिषद चार्टर को बनाए रखने के लिए निर्णायक और समावेशी रूप से काम कर सके।'
'1940 के दशक में अटकी हुई है'
वही भारत के हरीश स्थायी प्रतिनिधि ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र के सामने आज की चुनौतियों का मूल कारण एक ऐसी संरचना है, जो 1940 के दशक में अटकी हुई है। यह कुछ ऐसा ही है जैसे उन्नत एआई तकनीकों को 1945 के इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर (ENIAC) नामक कंप्यूटर के संस्करण पर चलाना।' मानव जाति के अनुकूलनशीलता के माध्यम से जीवित रहने और फलने-फूलने के लिए जिम्मेदार विकासवादी सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र इस मूलभूत विकासवादी सिद्धांत के प्रति उदासीन नहीं रह सकता। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों को सार्थक रूप से पूरा करने के लिए इसे लचीला और अनुकूलनीय होना चाहिए।'
पुनर्गठित परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की ओर से तर्क देते हुए हरीश ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना से पहले के समय से लेकर वैश्विक शांति में भारत के योगदान की ओर इशारा किया। परिषद के पांच स्थायी सदस्य द्वितीय विश्व युद्ध के विजेता हैं। उनके दावे युद्ध में उनकी भूमिकाओं पर आधारित हैं। वहीं, हरीश ने भारतीयों की ओर से किए गए समान बलिदानों को याद करते हुए भारत को भी इसी तरह का दावा करने का आधार दिया।