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पाकिस्तान हिंसा: आरोपियों के खिलाफ सैन्य कानून के तहत तुरंत हो कार्रवाई; नेशनल असेंबली में प्रस्ताव पारित

Mon, 12 Jun 2023 10:14 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पेश किए गए प्रस्ताव में बिना पीटीआई और इमरान खान का नाम लिए बिना नौ मई को हुई घटना के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें कहा गया है, एक राजनीतिक दल और उसके नेताओं ने नौ मई को सभी हदें पार कर सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए, जिससे राज्य के संस्थानों और देश को अपूरणीय क्षति हुई।
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इमरान खान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। नौ मई को हुईं हिंसा के बाद जहां एक ओर उनके सहयोगी एक के बाद एक उनका साथ और पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष  भी मोर्चा खोले हुए है। अब ताजा घटनाक्रम में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी को एक और झटका दिया है। दरअसल, सोमवार को रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक प्रस्ताव पारित कर नौ मई की हिंसा में शामिल पीटीआई और इमरान खान के खिलाफ सख्त सैन्य कानून के तहत त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

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नेशनल असेंबली ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर इसके बारे में जानकारी दी है। इसमें कहा गया कि रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को निचले सदन में बहुमत से मंजूरी भी मिल गई है। 

क्या है प्रस्ताव में?
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पेश किए गए प्रस्ताव में बिना पीटीआई और इमरान खान का नाम लिए बिना नौ मई को हुई घटना के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें कहा गया है, एक राजनीतिक दल और उसके नेताओं ने नौ मई को सभी हदें पार कर सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए, जिससे राज्य के संस्थानों और देश को अपूरणीय क्षति हुई। इसलिए, कानून और संविधान के अनुसार ऐसे सभी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।' 
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साथ ही प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही बदमाशों और अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

पाकिस्तान सेना अधिनियम 1952 के तहत दिया जाना चाहिए दंड
प्रस्ताव में सैन्य अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। रक्षा मंत्री ने अपने प्रस्ताव में कहा कि सेना के पास दुनिया भर में सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों के जवाब में कार्रवाई करने का अधिकार है। ऐसे में नौ मई को हुई हिंसा में शामिल सभी व्यक्तियों को उनके कार्यों के लिए पाकिस्तान सेना अधिनियम 1952 के तहत दंडित किया जाना चाहिए।

सदन में बोलते हुए रक्षा मंत्री आसिफ ने यह भी साफ कर दिया कि नौ मई के दोषियों के खिलाफ कोई नया कानून नहीं बनाया है, ये कानून पहले से मौजूद हैं। जहां आतंकवाद है, वहां मामलों को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत निपटाया जाएगा।

दरअसल, नौ मई को इस्लामाबाद में अर्धसैनिक रेंजरों द्वारा इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। उनकी गिरफ्तारी के विरोध में पीटीआई के कार्यकर्ताओं ने लाहौर कॉर्प्स कमांडर हाउस, मियांवाली एयरबेस और फैसलाबाद में आईएसआई भवन सहित 20 से अधिक सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी भवनों में तोड़फोड़ की थी। इतना ही नहीं, रावलपिंडी में सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) पर भी भीड़ ने हमला किया था। इस घटना के दो दिन बाद इमरान खान को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। 

10,000 पीटीआई कार्यकर्ता किए गए गिरफ्तार
हिंसा के बाद सरकार ने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। कार्रवाई के क्रम में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूरे पाकिस्तान में पीटीआई के 10,000 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 4,000 पंजाब प्रांत से हैं।
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पंजाब प्रांत के गृह विभाग ने नौ मई को हुए हमलों और हिंसक विरोध प्रदर्शनों की जांच के लिए 10 अलग-अलग संयुक्त जांच टीमों का गठन किया है। 

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