जैश ने कहा कि इमरान खान सरकार पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ की योजनाओं का अनुसरण कर रही है। बता दें जब अमेरिका में 9/11 हमला हुआ तो इसका विरोध पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ ने भी किया। जब इस बात का पता जैश को चला तो वो आग बबूला हो गया। उसने मुशर्रफ के इस्तीफे की मांग की। उसने इस्लामाबाद, मरी, तक्षशिला और बहावलपुर में भी हमले किए। इसके बाद 2003 में पाक सरकार ने आतंकी संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया।
इससे आतंकी मसूद अहजर और भी बौखला गया और उसने 14 दिसंबर और 25 दिसंबर, 2003 को दो बार मुशर्रफ के काफिले पर हमला किया। हमले में जो आरोपी थे उन्हें मुशर्रफ के कार्यकाल के दौरान ही फांसी भी दी गई। वहीं मसूद अजहर पर सख्ती कर उसे नजरबंद किया गया।
इमरान खान सरकार को लेकर जैश ने अपने बयान में कहा, "पहले उन्होंने भारतीय पायलट को रिहा किया और अब उन्होंने हमारे मदरसों पर नकेल कसने का फैसला लिया है। वह अपने दुश्मन (भारत) की ओर काफी नरम बने हुए हैं और अपने ही लोगों (जैश) के प्रति सख्त हैं।" इस आतंकी संगठन का कहना है कि इसने अपने कैडरों को पलायन और नए संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा है।
रविवार को अजहर की मौत के अटकलें तेज हो गई थीं। एक अज्ञात ब्लॉग में ये दावा किया गया था कि जब भारत ने स्ट्राइक की तो अजहर बालाकोट कैंप में मौजूद था, वह और आईएसआई के कर्नल सलीम गंभीर रूप से घायल हो गए। पोस्ट के मुताबित अजहर की शनिवार को मौत हो गई। वहीं बाकी रिपोर्ट्स में ये कहा गया है कि भारतीय सुरक्षा बल द्वारा अपने भतीजे को मारे जाने के बाद अजहर आखिरी बार बालाकोट में अक्तूबर में था।
बीते हफ्ते पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सीएनएन से कहा था कि उनकी जानकारी के मुताबिक अजहर पाकिस्तान में है और काफी बीमार है। वह इतना बीमार है कि अपने घर से बाहर भी निकल नहीं पा रहा है।