राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी से हैं। ऐसे में शहबाज शरीफ सरकार के मंत्रियों का आरोप है कि वह चुनाव की तारीखों की घोषणा के लिए आयोग पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक संकट के साथ सियासी चुनौतियों से भी जूझ रहा है। एक तरफ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में चुनाव की तारीखों की घोषणा के लिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं तो दूसरी तरफ कई ऐसे मामले आए हैं, जहां लोकतंत्र की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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इस बीच इमरान खान ने 22 फरवरी से 'जेल भरो तहरीक' की घोषणा कर दी है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी चुनाव की तारीखों की घोषणा के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा को 20 फरवरी को बैठक के लिए बुला लिया है। इसको लेकर शहबाज शरीफ सरकार ने राष्ट्रपति की आलोचना शुरू कर दी है और उन पर इमरान खान के लिए काम करने का आरोप लगया है।
चुनाव आयोग पर दबाव बना रहे राष्ट्रपति
दरअसल, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी से हैं। ऐसे में शहबाज शरीफ सरकार के मंत्रियों का आरोप है कि वह चुनाव की तारीखों की घोषणा के लिए आयोग पर लगातार दबाव बना रहे हैं। बता दें, बीते आठ फरवरी को भी उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने सीईसी को तलब किया है।
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इमरान खान के प्रवक्ता न बनें राष्ट्रपति
पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह ने कहा है कि आरिफ अल्वी को पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में काम करना चाहिए। उन्हें इमरान खान के प्रवक्ता के रूप में काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति का चुनाव की तारीख की घोषणा से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी चुनाव आयोग के मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए राष्ट्रपति की आलोचना की। आसिफ ने ट्वीट किया, आरिफ अल्वी, अपनी संवैधानिक मर्यादाओं में रहें। उन्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए। कम से कम अपने पद की गरिमा के बारे में सोचना चाहिए। कानून और न्याय मंत्री आजम नजीर तरार ने कहा, संविधान उन्हें प्रांतीय विधानसभा चुनावों की तारीखें देने के लिए अधिकृत नहीं करता है।