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पाकिस्तान में माथापच्ची: ‘आतंकवाद के मददगार’ का गहरा दाग कैसे धुले, FATF से बाहर निकलने का नहीं मिल रहा कोई रास्ता

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 07 Mar 2022 04:08 PM IST

सार

एफएटीएफ ने 2018 में पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाला था। उसकी वजह से विदेशी कंपनियां पाकिस्तान में निवेश करने को लेकर अधिक सतर्क हो गईं। एफएटीएफ मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को धन मुहैया कराने संबंधी गतिविधियों की निगरानी करती है...
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : Agency (File Photo)


एफएटीएफ ने 2018 में पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाला था। उसकी वजह से विदेशी कंपनियां पाकिस्तान में निवेश करने को लेकर अधिक सतर्क हो गईं। एफएटीएफ मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को धन मुहैया कराने संबंधी गतिविधियों की निगरानी करती है। इस बार की बैठक में पाकिस्तान के लिए राहत की बात यह रही कि एफएटीएफ ने वित्तीय अपराधों का मुकाबला करने के मामले में उसकी तरफ से उठाए गए कदमों की तारीफ की। एफएटीएफ ने इन कदमों को ठोस प्रगति बताया।

27 में 26 मुद्दों को हल करने का दावा

हम्माद अजहर ने शनिवार को एक ट्विट में कहा- ‘मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को आर्थिक मदद देने के खिलाफ हमारा संघर्ष हमारे राष्ट्रीय संकल्प का हिस्सा है। हम सिर्फ वैश्विक सुझावों का पालन करने के लिए नहीं, बल्कि अपने हित में यह संघर्ष कर रहे हैं।’ उन्होंने दावा किया कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सात में छह मुद्दों को पाकिस्तान ने रिकॉर्ड समय में हल कर लिया। जबकि आतंकवाद को आर्थिक मदद से जुड़े 27 में 26 मुद्दों को हल कर लिया गया है।



एफएटीएफ के ग्रे लिस्ट में डाले जाने के बाद पाकिस्तान ने इस एजेंसी की चिंताओं को दूर करने का वादा किया था। तब से एफटीएए की तरफ से बताए गए मुद्दों का समाधान ढूंढने की वह कोशिश कर रहा है। लेकिन एफएटीएफ की ताजा बैठक से साफ हो गया कि चार साल की लंबी अवधि में पाकिस्तान इस एजेंसी की सभी चिंताओं को दूर नहीं कर पाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार भले कुछ बिंदुओं पर प्रगति को लेकर अपनी पीठ थपथपाए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय का उस पर शक बना हुआ है। साथ ही ग्रे से काली सूची में खिसकने का खतरा भी लगातार मंडरा रहा है।


हाल में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी पाकिस्तान से कहा था कि एफएटीएफ की तरफ से बताए गए चिंता के सभी बिंदुओं को जल्द से जल्द दूर करे। पाकिस्तान ने आर्थिक संकट से निपटने के लिए हाल में आईएमएफ से कर्ज लिया है।

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