यूक्रेन पर रूसी हमले से गहराते संकट के बीच आसियान देशों में बेचैनी बढ़ रही है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के इस संगठन के सदस्य देशों में अंदेशा है कि यूक्रेन युद्ध का दक्षिण चीन सागर विवाद पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। आसियान में कुल दस देश शामिल हैं।
यूक्रेन पर हमला होते ही कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन और मलेशिया के प्रधानमंत्री इस्लाइल साबरी ने इस बारे में बातचीत की थी। कंबोडिया इस समय आसियान का अध्यक्ष है। इस बीच कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन खाड़ी के अखबार स्ट्रेट्स टाइम्स से कहा है- ‘हालांकि हम दूर हैं और एक छोटा देश हैं। लेकिन इस जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे हमसे अति संबंधित हैं।’ आसियान के सदस्य देश सैनिक रूप से समजोर समझे जाते हैं।
आसियान के विदेश मंत्रियों ने एक बयान में कहा है- ‘यूक्रेन में उभरती स्थिति और वहां बढ़ रहे सशस्त्र टकराव से हम बेहद चिंतित हैं। हम संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम दिखाने की अपील करते हैं।’ पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि आसियान विदेश मंत्रियों के बयान में रूस का नाम लेकर जिक्र नहीं किया गया। रूस ने जब 2014 में क्राइमिया को अपने में मिला लिया था, तब आसियान ने कोई बयान जारी नहीं किया था। उसे देखते हुए यह माना गया है कि इस बार आसियान देश अपनी भावना खुल कर बता रहे हैं।
पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में जब रूस की निंदा के लिए प्रस्ताव लाया गया था, तो आसियान के दस सदस्यों में से आठ ने उसके पक्ष में मतदान किया था। वियतनाम और लाओस मतदान ने खुद को मतदान से अलग रखा था। विशेषज्ञों का कहना है कि आसियान इस देश बार इसलिए चिंतित हैं, क्योंकि उनकी राय में यूक्रेन में जो हुआ, वह दक्षिण चीन सागर की स्थिति से मेल खाता है। उन्हें आशंका है कि दक्षिण चीन सागर में चीन जबरन यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर सकता है।