भारतीय कूतिनीतिज्ञों का अनुमान है कि पड़ोसी देश जबतक आतंकवाद के विरुद्ध ठोस कदम नहीं उठाता, उसका बाहर आना मुश्किल है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय बॉडी है। इसने सवाल उठाया है तो पाकिस्तान को इसके कुछ कॉलम पूरे करने होंगे।
एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर आने का ममला पाकिस्तान के लिए इतना आसान नहीं है। सूत्र का कहना है कि तुर्की के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान की यात्रा के दौरान चाहे जो राजनीतिक बयान दे दिया हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
भारत ने पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को की जा रही वित्तीय मदद और संरक्षण का मुद्दा काफी पहले से अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। मुंबई में 26 नवंबर को हुए आतंकी हमले के बाद मिले सबूतों को आधार बनाकर भारत ने पाकिस्तान को तेजी से घेरा शुरू किया था।
भारत की यह कोशिश पाकिस्तान को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद रोकने के लिए रही। भारत का आरोप है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद का उपयोग अपनी जमीन से भारत के विरोध आतंकी संगठनों को संरक्षण तथा उन्हें वित्तीय मदद देने में करता है।
इसी बिना पर अमेरिका समेत अन्य देशों भी पाकिस्तान को आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कर्रवाई करने के लिए दबाव बना रहे हैं। बताते हैं भारत ने अपनी इस मुहिम को जारी रखा है।
एफएटीएफ में भी भारत लगातार पाकिस्तान के आतंकवाद के विरुद्ध सदस्य देशों का सहयोग और समर्थन जुटा रहा है। बताते हैं इसी लॉबिंग का नतीजा रहा है कि एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को उसके अनुमानित सहयोगी देशों का भी खुलकर समर्थन नहीं मिल पा रहा है।