आईसीबीएम को लेकर चिंताएं इसलिए भी जताई जाती हैं, क्योंकि इन्हें मुख्यतः परमाणु हथियार के तौर पर बनाया जाता है। हालांकि, इन्हें पारंपरिक गोला-बारूद, रासायनिक या जैविक हमलों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
किस तकनीक पर काम करती हैं आईसीबीएम?
आईसीबीएम तीन चरणों में काम करती है।
- लॉन्चिंग और बूस्ट फेज: मिसाइल के पीछे लगे रॉकेट इसे आगे धकेलते हैं। रॉकेट इसे 3 से 5 मिनट तक ऊपर ले जाने का काम करते हैं। इस दौरान आईसीबीएम की गति 4 किलोमीटर प्रति सेकंड से 7.8 किमी प्रति सेकंड तक पहुंच जाती है। इन्टरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें पृथ्वी के दायरे को पार करते हुए जमीन से 150-400 किमी तक ऊपर जा सकती हैं।
- मध्य फेज: इसके बाद आईसीबीएम पृथ्वी की कक्षा में रहते हुए अपने निशाने की तरफ बढ़ती है। यह समय मिसाइल के ऊपर जाने के बाद उसके नीचे आने की शुरुआत का होता है और इसी दौरान पृथ्वी की सबसे ऊपरी कक्षा में रहते हुए निशाने तक अधिकतम दूरी कवर करती है।
- निशाने पर गिरने का फेज: आईसीबीएम नीचे गिरने के दौरान पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से और ज्यादा गति हासिल करती है। जमीन पर स्थित निशाने से करीब 100 किलोमीटर ऊंचाई पर यह मिसाइल अलग-अलग हथियार (पेलोड) को लॉन्च कर सकती है, जो कि एक बार में कई जगहों को एक साथ निशाने पर ले सकते हैं। यह पेलोड 7 किमी प्रति सेकंड की तीव्र रफ्तार से लक्ष्य को भेद सकते हैं।
इसके अगले ही दिन अमेरिका के तत्कालीन प्रधान डिप्टी एनएसए जॉन फाइनर ने कहा था कि पाकिस्तान एक परिष्कृत मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है। इनमें वे उपकरण भी शामिल हैं, जिससे उसे बड़ी रॉकेट मोटर्स की टेस्टिंग में मदद मिलेगी। तब फाइनर ने अंदेशा जताया था कि पाकिस्तान आईसीबीएम कार्यक्रम को अमेरिका को ध्यान में रखते हुए विकसित कर रहा है और अगर यह जारी रहा तो उसके पास दक्षिण एशिया से काफी दूर अमेरिका तक पर हमले की क्षमता होगी।
फाइनर के इस बयान के बाद माना जा रहा था कि पाकिस्तान जिस मिसाइल को बनाने की तैयारी कर रहा है, उसकी क्षमता 10 हजार किलोमीटर से ज्यादा मार करने की हो सकती है, क्योंकि दोनों देशों की दूरी लगभग इतनी ही है। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए तब खुलासा हुआ था कि चीन की मदद से पाकिस्तान बड़ी रॉकेट मोटर बनाने की कोशिश में जुटा है।
अमेरिकी खुफिया विभाग के मुताबिक, अगर पाकिस्तान लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें बना लेता है, तो यह सीधे तौर पर वॉशिंगटन के लिए खतरा होगा और उसे इस्लामाबाद को एक परमाणु शक्ति से संपन्न दुश्मन की तरह चिह्नित रखना होगा। बयान में कहा गया कि पाकिस्तान दावा करता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम भारत, जो कि पारंपरिक सैन्य ताकत में आगे है, को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। हालांकि, आगे अगर कभी भारत और पाकिस्तान में जंग होती है तो वह आईसीबीएम को विकसित कर अमेरिका को अपने हथियारों को तबाह करने से रोकने या जंग में भारत की तरफ से दखल देने से रोकने के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
किन-किन देशों के पास है आईसीबीएम?
मौजूदा समय में आठ देशों- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, भारत, इस्राइल, उत्तर कोरिया और ब्रिटेन के पास आईसीबीएम का जखीरा है।