14 दिन के प्रवास में 60 प्रयोग करेंगे
अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में 14 दिन बिताएंगे और इस दौरान 60 प्रयोग करेंगे। इनमें सूक्ष्मगुरुत्व में मधुमेह, इंसुलिन समेत कई अन्य प्रयोग के साथ नई तकनीकी का परीक्षण व विकास आदि शामिल है। शुभांशु भारतीय शिक्षण संस्थानों के तैयार सात प्रयोग भी करेंगे। इनमें ज्यादातर बायोलॉजिकल स्टडीज होंगी, जैसे अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य और जीवों पर असर देखना। साथ ही वह नासा के साथ 5 और प्रयोग करेंगे। ये लंबे अंतरिक्ष मिशनों के लिए डाटा जुटाएंगे।
छह बार टाला गया मिशन
सफल उड़ान से पहले एक्सिओम-4 मिशन को विभिन्न कारणों से 6 बार टाला गया था। सबसे पहले 29 मई को अंतरिक्ष यान के तैयार नहीं होने के कारण उड़ान टाली गई। इसे 8 जून के लिए निर्धारित किया गया। हालांकि फाल्कन-9 रॉकेट लॉन्च के लिए तैयार नहीं था। नई तिथि 10 जून तय की गई लेकिन मौसम खराब होने की वजह से इसे टाल दिया गया। चौथी बार 11 जून को मिशन के उड़ान की तारीख तय की गई लेकिन ऑक्सीजन लीक होने के चलते स्थगित करनी पड़ी। नई तिथि 19 जून दी गई, इस तिथि पर मौसम की अनिश्चितता, चालक दल की सेहत के कारण फिर से टल गया। छठी बार मिशन को 22 जून के लिए निर्धारित किया गया लेकिन आईएसएस के ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल के मूल्यांकन करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए था जिसके कारण मिशन टल गया।
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गगनयान मिशन में आएगा काम
शुभांशु का आईएसएस का अनुभव भारत के गगनयान मिशन में काम आएगा। यह भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन होगा। इसका उद्देश्य भारतीय गगनयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है। इसे 2027 में लॉन्च किया जाना है। भारत ने एक्सिओम-4 मिशन पर अब तक करीब 548 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें शुभांशु और उनके बैकअप ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर के प्रशिक्षण का खर्च भी शामिल है। ये पैसे प्रशिक्षण, उपकरण, और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में लगे हैं। यह मिशन गगनयान के लिए भारत के अभ्यास की तरह है।