पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट से 26/11 हमले के मास्टरमाइंड जकी-उर रहमान लखवी की जमानत रद्द करने को कहा है। बता दें लखवी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तयैबा का सदस्य है। लेकिन अभी तक उसे कोई सजा नहीं सुनाई गई है। भारत इस हमले के सभी सबूत सौंप चुका है बावजूद इसके मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
आतंकवाद विरोधी अदालत में लखवी समेत सात लोगों के ट्रायल में बीते एक दशक में काफी कम प्रगति हुई है। लखवी को 2015 में जमानत दी गई थी और उसके ठिकाने के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है। वहीं अन्य छह लोग रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। पाकिस्तान की जांच एजेंसी अब अचानक से जमानत रद्द करने की बात कर रही है। इतने सालों से क्यों लखवी की जमानत रद्द करने की बात नहीं की गई।
अदालत ने इस साल जनवरी में 26/11 के ट्रायल को निलंबित कर दिया था, ताकि 19 गवाहों को पेश करने के लिए अभियोजन पक्ष को समय मिल सके। जिन्होंने अभी तक गवाही नहीं दी है। वहीं जज का मानना है कि कुछ गवाह डर के कारण पेश नहीं हो रहे हैं।
इस्लामाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आतंकवाद विरोधी अदालत में मामले की सुनवाई पर संघीय जांच एजेंसी की याचिका के बाद रोक लगा दी थी। जो मुंबई हमले के ट्रायल में गवाहों को पेश करने के लिए समय चाहती है।
बीते साल पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी एक साक्षात्कार में ये बात स्वीकार कर चुके हैं कि मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे। ये बात उस वक्त पहचान ना बताने की शर्त पर मामले से जुड़े अधिकारियों ने कही थी।
यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नवंबर 2018 में भारतीय मीडिया से बात करते हुए कहा था कि हमले में शामिल लोग पाकिस्तान से थे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही भारत ने भी हमले की 10वीं बरसी पर कहा था कि पाकिस्तान को हमले के आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। भारत ने कहा था कि ये हमला आतंकी संगठन लश्कर-ए-तयैबा ने कराया था। मामले में न्याय के लिए पाकिस्तान को समझदारी दिखानी चाहिए। हमले को दस साल से अधिक का समय हो गया है लेकिन अभी तक पाकिस्तान ने कोई कार्रवाई नहीं की है।