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Pakistan: इमरान खान की चुनौती का कोई तोड़ नहीं पाकिस्तान के सत्ताधारी गठबंधन के पास?

Fri, 23 Sep 2022 07:46 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan: विश्लेषकों के मुताबिक इमरान खान का ये रुख उनके इस भरोसे पर टिका हुआ है कि भले ही अदालतों का फैसला भी उनके खिलाफ जाए, लेकिन उनके लाखों समर्थक उनके साथ बने रहेंगे...
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Pakistan- Imran Khan - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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सत्ता पक्ष की तरफ से कानूनी दांवपेच में उलझाने की कोशिशों से बेपरवाह रहते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तान की ‘असली आजादी’ के लिए अपनी मुहिम का नया दौर शुरू करने का एलान किया है। उनकी ये मुहिम शनिवार से शुरू हो जाएगी। उन्होंने खास कर वकीलों से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि वे सबको साथ लेकर देश में फिर से कानून का राज कायम करेंगे और असली आजादी ले आएंगे।

लाहौर में वकीलों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए इमरान खान ने सरकार विरोधी नए कार्यक्रम का एलान उनके खिलाफ दायर किए गए अवमानना मामले में कोर्ट का फैसला आने के एक दिन पहले किया। ये मुकदमा एक भाषण के दौरान एक महिला मजिस्ट्रट को उनकी तरफ से दी गई कथित धमकियों को लेकर दायर किया गया था। बीते सोमवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ सरकार की तरफ से लगाए गए आतंकवाद के अभियोग खारिज कर दिया। लेकिन अभी कई और कानूनी मामलों का साया उन पर मंडरा रहा है।

विश्लेषकों के मुताबिक इमरान खान का ये रुख उनके इस भरोसे पर टिका हुआ है कि भले ही अदालतों का फैसला भी उनके खिलाफ जाए, लेकिन उनके लाखों समर्थक उनके साथ बने रहेंगे। पिछले अप्रैल में सत्ता गंवाने के बाद से इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने शहबाज शरीफ सरकार के लगातार अभियान चलाया है। इस दौरान पीटीआई नेताओं ने आरोप लगाए हैं कि इमरान खान को विदेश में रची गई साजिश के तहत सत्ता से हटाया गया। इस साजिश में सेना प्रतिष्ठान, मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन में शामिल नेता, और न्यायपालिका का एक हिस्सा भी शामिल था।

पीटीआई के अभियान के दौरान खास कर सेना की खुलेआम आलोचना को लेकर देश के एक बड़े हिस्से में असहजता का भाव रहा है। पाकिस्तानी राजनीति की विशेषज्ञ और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्राध्यापक आयशा सिद्दिका ने इस बारे में वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- इमरान खान सेना नेतृत्व पर दबाव बनाना चाहते हैं, ताकि वह उनका समर्थन करने को मजबूर हो जाए।

लेकिन सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) को अधिक चिंता इमरान खान को मिल रहे जनसमर्थन से है। जुलाई में पंजाब प्रांत के उप चुनावों में पीटीआई की भारी जीत हुई। उसके बाद सिंध प्रांत की राजधानी कराची में हुए एक उप चुनाव में भी पीटीआई जीती। पीएमएल (नवाज) के एक नेता ने निक्कई एशिया से बातचीत में स्वीकार किया कि राजनीतिक रूप से अब इमरान खान उससे अधिक ‘खतरनाक और लोकप्रिय’ हो गए हैं, जितना वे इस अप्रैल के पहले थे।

आयेशा सिद्दिका ने भी यह कहा कि इमरान खान ने लोगों के मन में जगह बना ली है, जिससे पीएमएल-एन चिंतित है। समझा जाता है कि इसी चुनौती के कारण सत्ताधारी गठबंधन ने इमरान खान को कानूनी दांवपेच में फंसाने की रणनीति अपनाई है। लेकिन पर्यवेक्षकों की राय है कि ये रणनीति उलटी पड़ सकती है। अगर इमरान खान को जेल भेजा गया, तो उनके समर्थक उसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ देंगे, जो हिंसक मोड़ भी ले सकता है।

बुधवार को वकीलों के सम्मेलन में इमरान खान ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान में श्रीलंका जैसी स्थिति तेजी से बन रही है। उन्होंने कहा- देश तेजी से ऐसी सामाजिक अशांति की तरफ बढ़ रहा है, जैसा पिछले 50 साल में नहीं देखा गया।

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