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Sri Lanka Crisis: श्रीलंका सरकार की अस्थिर नीतियां बन गई हैं लोगों की परेशानी का कारण

Fri, 23 Sep 2022 07:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

Sri Lanka Crisis: मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस समय श्रीलंका में पशुओं के चारे की भारी कमी हो गई है। इसे सरकार की अस्थिर नीतियों का परिणाम माना जा रहा है। बीते 25 जून को कंज्यूमर अफेयर अथॉरिटी ने पशुओं को चावल खिलाने पर सख्त रोक लगा दी थी...
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Sri Lanka Crisis: President Ranil Wickremesinghe - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अब तक खाद्य संकट से जूझ रहे श्रीलंका में सरकार अब आयात किए गए चावल को पशुओं का चारा बनाने की तैयारी में है। कृषि मंत्री महिंदा अमरावीरा ने कहा है कि मौजूदा सीजन में देश में चावल की रिकॉर्ड पैदावार होने जा रही है। इसलिए अब आयातित चावल को पशुओं को खिलाया जा सकता है। जब देश का कृषि मंत्रालय यह शाही अंदाज दिखा रहा है, उसी समय सरकार ने महिलाओं के सेनेटरी पैड पर टैक्स बढ़ा दिया है। इसकी देश में कड़ी आलोचना हो रही है।

कृषि मंत्री अमरावीरा ने कहा है- ‘कुछ समय पहले चावल आयात करने की जरूरत थी। लेकिन इस सीजन में किसानों ने ज्यादा धान उगाया है। उन्हें उर्वरक मुफ्त में दिया गया, जिसका फायदा हुआ है। अब हमारी समस्या यह सुनिश्चित करने की है कि किसानों से धान की खरीदारी हो। अब आयात की जरूरत नहीं है, बल्कि आयात हो चुके चावल को पशुओं को खिलाया जा सकता है।’

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस समय श्रीलंका में पशुओं के चारे की भारी कमी हो गई है। इसे सरकार की अस्थिर नीतियों का परिणाम माना जा रहा है। बीते 25 जून को कंज्यूमर अफेयर अथॉरिटी ने पशुओं को चावल खिलाने पर सख्त रोक लगा दी थी। तब मुर्गी पालक मुसीबत में रहे हैं। इस कारण चिकेन और अंडों की महंगाई बढ़ती चली गई है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब सरकार ने इस समस्या का हल निकालने की कोशिश की है। लेकिन इस समय आयातित चावल 190 (श्रीलंकाई) रुपये प्रति किलो बिक रहा है। मुर्गी पालकों के लिए इतनी कीमत चुकाना आसान नहीं है।

उधर देसी चावल अभी 220 रुपये किलो बिक रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग अभी भी आयातित चावल खरीद रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सरकार ने इस चावल को पशुओं को खिलाने की नीति अपनाई, तो उससे ये चावल महंगा होगा और श्रीलंका के आम लोगों का बजट और बिगड़ेगा।

निजी चावल मिल मालिकों का कहना है कि किसान उन्हें 100 रुपये किलो धान बेच रहे हैं, जबकि पहले ये भाव 50 रुपये किलो के आसपास रहता था। इस महंगाई की वजह किसानों की लागत में बढ़ोतरी है। इसलिए चावल मिलों के लिए आयातित चावल से सस्ते में देसी चावल बेचना संभव नहीं है।

उधर श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री केहेलिया रामबुकवेला सेनेटरी पैड्स पर टैक्स बढ़ाने के सरकार के कदम का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि ये फैसला सिर्फ आयातित सेनेटरी पैड्स पर लागू होगा। इसका मकसद देश के अंदर सेनेटरी पैड्स के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय श्रीलंका के बाजारों में आयातित और देश में उत्पादित सेनेटरी पैड्स के पैक 350 से 800 रुपये में मिल रहे हैं। जबकि साल भर पहले ये भाव 110 रुपये था। आलोचकों का कहना है कि टैक्स बढ़ाने की सरकारी नीति का परिणाम यह हुआ है कि हर ब्रांड के सेनेटरी पैड्स की कीमत बढ़ी है। इसकी वजह देसी पैड्स की मांग अचानक बढ़ जाना है। इससे महिलाओं को अपनी सेहत से समझौता करने की नौबत आ सकती है।

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