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Pakistan: इमरान खान की मुहिम से बढ़ रही हैं आर्थिक मुसीबत में धंसते पाकिस्तान की मुश्किलें

Wed, 01 Jun 2022 07:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

विश्लेषकों के मुताबिक आईएमएफ से सहायता पाने के लिए शरीफ सरकार अलोकप्रिय फैसले लेने पर भी मजबूर हुई है। इसी के तहत पेट्रोल के दामों में 30 रुपये प्रति लीटर की एक साथ बढ़ोतरी की गई। इससे जनता के एक हिस्से में सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ा है...
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इमरान खान - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान सरकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच चल रही बातचीत पर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का साया मंडरा रहा है। खान ने नए चुनाव की मांग पर जोर डालने के लिए फिर इस्लामाबाद कूच करने का एलान कर रखा है। जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार की प्राथमिकता इस समय आईएमएफ से 90 करोड़ डॉलर की सहायता जल्द से जल्द हासिल करना है। इसकी वजह यह है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खाली हो रहा है।

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विश्लेषकों के मुताबिक आईएमएफ से सहायता पाने के लिए शरीफ सरकार अलोकप्रिय फैसले लेने पर भी मजबूर हुई है। इसी के तहत पेट्रोल के दामों में 30 रुपये प्रति लीटर की एक साथ बढ़ोतरी की गई। इससे जनता के एक हिस्से में सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ा है। इस्लामाबाद स्थित एक थिंक टैंक में सीनियर फेलॉ मुशर्रफ जैदी के मुताबिक यह सत्ताधारी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार के लिए तात्कालिक चुनौती है। उन्होंने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘सरकार के सामने इससे बड़ा सवाल यह है कि इन अल्पकालिक फैसलों के परिणाम से वह कैसे उबरेगी। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या उसे संसद की बची अवधि तक शासन चलाने के लिए सेना का समर्थन मिलेगा?’

इमरान बनाए रखना चाहते हैं दबाव

दूसरे विशेषज्ञों की भी राय है कि शरीफ सरकार का टिकना सेना के समर्थन और सद्भाव पर ही निर्भर करेगा। इस बीच पर्यवेक्षकों की नजर इमरान खान की अगली चाल पर है। पिछले हफ्ते खान ने नए चुनाव का कार्यक्रम घोषित करने के लिए छह दिन की डेडलाइन देते हुए अपना ‘आजादी मार्च’ अचानक खत्म कर दिया था। कराची स्थित आर्थिक नीति विश्लेषक नदीम हुसैन ने कहा है कि इमरान खान सरकार पर दबाव बनाए रखने पर आमादा हैं। लेकिन पिछले हफ्ते जिस तरह उन्होंने अचानक इस्लामाबाद में अपना धरना खत्म किया, उससे शरीफ सरकार को राहत मिली है।

पाकिस्तान की मौजूदा नेशनल असेंबली का कार्यकाल अगस्त 2023 तक है। जानकारों का अनुमान है कि फिलहाल सेना शरीफ सरकार को समय देगी, ताकि वह आर्थिक मुसीबत से देश को निकाल सके। बीते 20 मई को देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ दस बिलियन डॉलर बचे थे। जबकि जून के अंत तक विदेशी कर्ज चुकाने के लिए 8.6 बिलियन डॉलर की जरूरत है। इस बीच मदद के नाम पर पाकिस्तान को सिर्फ सऊदी अरब से तीन बिलियन डॉलर की मदद मिली है।

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अर्थशास्त्रियों के मुताबिक पेट्रोलियम सब्सिडी में कटौती के सरकार के फैसले से मुद्रास्फीति और बढ़ेगी। जबकि रिसर्च कंसल्टैंसी फर्म कैपिटल इकोनॉमिक्स के मुताबिक अप्रैल में ही मुद्रास्फीति दर 13.4 फीसदी पर थी, जो पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक के लक्ष्य से दोगुना ज्यादा है।

इमरान का आम चुनावों पर जोर

अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में पाकिस्तान इनिशिएटिव इकाई के निदेशक उजैर युनूस के मुताबिक अगले 12 से 18 महीनों की अवधि पाकिस्तान के लिए बहुत कठिन है। इसका सामना पीडीएम सरकार को करना होगा। उन्होंने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘सरकार अगर सब्सिडी घटाएगी तो महंगाई बढ़ेगी और उस कारण सरकार का राजनीतिक समर्थन घटेगा।’

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक पाकिस्तान हाउस के महानिदेशक मोहम्मद अतहर जावेद की राय है कि अगर इमरान खान ने नए चुनाव पर जोर डालना जारी रखा, तो उसकी भारी कीमत देश को चुकानी होगी। उन्होंने कहा- ‘यह देश के लिए अच्छा नहीं है। इस समय देश को एक ऐसी सरकार की जरूरत है, जो काम करे और जो आईएमएफ से बातचीत चला सकने में सक्षम हो।’

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